आगरा। ताजमहल से नौ किलोमीटर दूर वो रास्ता है, जिसका नाम दुनिया भर के क्रिकेट-दीवानों की जुबान पर है। शाहगंज की अवधपुरी कॉलोनी में ‘अर्जुन अवार्डी क्रिकेटर दीप्ति शर्मा’ मार्ग है। यह नामकरण तब हुआ, जब इस इलाके की बेटी दीप्ति शर्मा ने विश्व क्रिकेट में कमाल कर दिया। दीप्ति के भाई सुमित शर्मा बता रहे हैं कि इन्हीं गलियों में हम खेले, बड़े हुए। नामकरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आए थे। उन्होंने कहा कि आसपास की सभी सडक़ दुरुस्त करो… दीप्ति के नाम का मामला है। अब कॉलोनी का नाम भी दीप्ति के नाम पर करने की तैयारी है।

थ्रो से हुई क्रिकेट सफर की शुरुआत
दीप्ति के क्रिकेट-सफर की शुरुआत एक थ्रो से हुई। मैं प्रैक्टिस करने जाता था और वो बाहर बैठती थी। एक रोज उसके पैर में गेंद लग गई। उसने गुस्से में बॉल उठा कर मैदान में फेंकी। करीब 80 मीटर दूरी से फेंके गए उस थ्रो ने स्टंप उखाड़ दिया। वहीं मौजूद क्रिकेटर हेमलता काला की नजर पड़ी। उन्होंने दीप्ति से मुलाकात की और खेलने के लिए मना लिया। रेलवे से रिटायर हुए पिता भगवान शर्मा बताते हैं कि आसपास वाले कहते थे, लडक़ी को कहां भेज रहे हो… डॉक्टर, इंजीनियर बनाओ। धूप में रंग काला हो जाएगा, तो कौन शादी करेगा। हमने किसी की नहीं सुनी।
गेट पर ताला लगा देती थी मां
मां शालीनी शर्मा को दीप्ति के क्रिकेट से ऐतराज था। वो कई बार मेन गेट पर ताला लगा देती थीं, लेकिन दीप्ति निकल जाती थी। जब घरेलू क्रिकेट में नाम चल गया, तो मां भी मान गईं। अर्जुन अवार्ड से नवाजे जाने पर पूरा परिवार गर्व से कह रहा था कि हम दीप्ति के घर के लोग हैं। मां सुशीला शर्मा कह रही हैं कि आज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दीप्ति की सबसे बड़ी परीक्षा है। सेमीफाइनल में कमाल कर गई, तो 140 करोड़ लोगों की नायक बन जाएगी।
