चेन्नई। इंदौर के होलकर स्टेडियम में रिकॉर्ड गेंदबाजी करने वाली ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर एलेना किंग की जड़ें भारत में ही हैं। माता-पिता लेरॉय और शेरन का जन्म चेन्नई में हुआ। 1980 में वे मेलबर्न चले गए। 2022 में पहली बार एलेना अपने पुरखों के सामने खेलीं। नवी मुंबई में हुए मुकाबले में एलेना के माता-पिता और चेन्नई वाला परिवार भी पहुंचा था। पिछले विश्व-कप के सेमीफाइनल में भी एलेना ने नाम कमाया था।
घर के पीछे शुरु हुआ करियर
किंग ने बताया कि मेरा क्रिकेट करियर घर के पीछे से चालू हुआ। गार्डन में रखे गमलों को मैंने और भाई ने गोलाकार में जमा दिया। वो हमारी बाउंड्री बन गई। उन्हीं के बीच खेलने लगे। भाई भी ऑस्ट्रेलिया में घरेलू क्रिकेट खेलता है। उसे बल्लेबाजी का शौक था, इसलिए मैं गेंदबाज बन गई। जगह कम थी, तो मजबूरी में लेग-स्पिन गेंदबाजी करना पड़ती थी। वहां से कलाई को ऐसी आदत पड़ी कि तेज भी फेंकना चाहूं, तो गेंद लेग-स्पिन हो जाती है। स्कूल की टीम में बल्लेबाज कम थे, इसलिए मुझे तीसरे नंबर पर खेलाया जाता था। वहीं से बल्ला चलाना भी सीख गई।
परिवार से मिलने आ चुकी हैं भारत
परिवार सहित भारत घूमने भी आ चुकी हूं। इस बार वक्त कम मिला है, इसलिए किसी से नहीं मिल पाई हूं। लेग-स्पिन को पसंद करने वाले दुनिया के हर ब”ो की तरह मेरे हीरो भी शेन वॉर्न रहे हैं। एक बार उनसे मिली थी, तो उन्होंने कहा था कि तुम तो उस जमीन से आती हो, जिसे स्पिन गेंदबाजी का अखाड़ा माना जाता है। मेहनत जारी रखो, कामयाबी मिलेगी। एलेना का सफर एक दशक से जारी है। इंदौर में 7 विकेट लेकर उस खास लिस्ट में शामिल हो गईं, जिसमें ग्लैन मैग्रा भी हैं। इसी विश्व-कप में जब पाकिस्तान के खिलाफ महज 70 रन पर ऑस्ट्रेलिया के 6 विकेट गिर गए थे, तो एलेना ने बल्ले से दम दिखाया और दसवें नंबर पर आकर पचासा जड़ा था।
