श्योपुर, मध्य प्रदेश: अफ्रीकी देश Botswana से शनिवार सुबह 9 नए चीते भारत के कूनो नेशनल पार्क में सुरक्षित रूप से पहुँच गए हैं। यह भारत में चीता पुनर्बास परियोजना यानी Project Cheetah के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इन नए आगंतुकों के साथ देश में चीतों की कुल संख्या अब 48 हो गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
लंबी यात्रा के बाद कूनो पहुँचे चीते
Botswana से इन चीतेनों का सफर करीब 12 घंटे लंबा रहा। पहले उन्हें स्पेशल भारतीय वायुसेना (IAF) के विमान द्वारा ग्वालियर एयरबेस पर लाया गया। वहाँ से वायुसेना के तीन हेलीकॉप्टरों के ज़रिए उन्हें कूनो नेशनल पार्क के बाड़ों तक पहुंचाया गया। इन चीतेनों को पहले क्वारंटीन क्षेत्र में रखा जाएगा ताकि उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और स्थानीय वातावरण में अनुकूलन की प्रक्रिया का निरीक्षण किया जा सके।
इन नए चीते में 6 मादा और 3 नर शामिल हैं जो विविध आयु एवं अनुकूलन क्षमता के साथ प्रोजेक्ट को मजबूत करेंगे। कूनो में अब उच्च स्तरीय जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रम को और मजबूती मिली है।
भारत में चीता परियोजना की वर्तमान स्थिति
भारत में चीते लगभग 75 साल पहले विलुप्त हो गए थे और इसका पुनर्स्थापन Project Cheetah के तहत 2022 में शुरू किया गया था। इस परियोजना के तहत अब तक चीते तीन अलग-अलग देशों से लाए जा चुके हैं, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब Botswana। इससे कूनो में चीतों की आबादी में विविधता आयी है, जो भविष्य में प्रजनन और विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है।
इस परियोजना के तहत अब तक यहाँ कुल चीतों की संख्या 48 हो चुकी है। इसमें से कई भारतीय मिट्टी पर जन्मे शावक भी शामिल हैं जो पोषण और सुरक्षा के उत्कृष्ट प्रदर्शन को दर्शाते हैं। नवीनतम संख्या में यह परिवर्तन उस मजबूत जैव संरक्षण योजना का संकेत है जिसे केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से आगे बढ़ा रही हैं।
केंद्रीय मंत्री का स्थान पर स्वागत
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कूनो नेशनल पार्क में नवीन आगंतुक चीते का स्वागत किया और उन्हें चरित्र बाड़ों में रिलीज़ किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चीतों की संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं है, बल्कि भारत में प्रकृति और जैव विविधता की रक्षा का एक ऐतिहासिक अभियान है। मंत्री ने आगे बताया कि आने वाले समय में चीता आबादी को 50 तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो इस परियोजना की सफलता को और भी निर्धारित करेगा।
क्वारंटीन और स्वास्थ्य जांच
इन नए चीते को विशेष रूप से तैयार बाड़ों में रखा जाएगा और विशेषज्ञों की निगरानी में रोज़ाना स्वास्थ्य जांच, खाने-पीने की आदतें, नए वातावरण में प्रतिक्रियाएँ और किसी भी प्रकार के तनाव संकेतों का ध्यान रखा जाएगा। यह प्रक्रिया लगभग एक महीने तक चलेगी, जिसके बाद विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर इन्हें धीरे-धीरे पार्क के बड़े भाग में छोड़ा जाएगा।
कूनो और गँधी सागर अभ्यारण्य में चीता आबादी
इन 9 चीते के अलावा कुछ चीते गांधी सागर अभ्यारण्य (मंदसौर) में भी बसे हुए हैं। कूनो नेशनल पार्क को Project Cheetah के तहत प्रमुख स्थल के रूप में चुना गया है क्योंकि यहाँ का वातावरण, शिकार प्रजातियाँ और खुली घासभूमि चीतों के प्राकृतिक आवास के अनुकूल हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि ये विशाल बिल्लियाँ स्वस्थ रूप से अपनी पारिस्थितिक भूमिका निभा सकें।
पर्यावरण पर प्रभाव और महत्व
चीते दुनिया के सबसे तेज़ जमीन पर दौड़ने वाले जानवर हैं और इन्हें पुनर्स्थापित करना पारिस्थितिक संतुलन और जंगलों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। Project Cheetah न केवल भारत की किस्मत बदल रहा है बल्कि यह वैश्विक जैव विविधता संरक्षण प्रयासों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इससे स्थानीय इकोसिस्टम में संतुलन, शिकार प्रजातियों का नियंत्रण और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य की योजनाएँ और लक्ष्य
वन विभाग और Project Cheetah के निदेशक का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इन चीतों को खुली प्रकृति में भी डाला जाए ताकि वे वास्तविक वन्य जीवन शैली अपना सकें। इसके साथ ही योजनाएँ हैं कि जनसंख्या विविधता और प्रजनन दर को बढ़ाया जाए, ताकि दीर्घकालिक संरक्षण लक्ष्य हासील किया जा सके। जैसे-जैसे चीतों की संख्या बढ़ेगी, भारत का जैव विविधता संरक्षक मानचित्र और सशक्त बनेगा।
https://www.instagram.com/p/DVStDqagj1S/?igsh=bTV0dWJodmFqaDNp
