मध्यप्रदेश के Burhanpur जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दिव्यांगजनों के लिए चल रही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के नजदीकी बाकड़ी गांव में रहने वाला एक दिव्यांग दंपती पिछले तीन वर्षों से pension पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता को उजागर किया है बल्कि यह भी दिखाया है कि कई बार योजनाएं होने के बावजूद लाभार्थियों तक उनका फायदा नहीं पहुंच पाता।
पति नाबीना, पत्नी अपाहिज, फिर भी नहीं मिल रही सहायता
स्थानीय जानकारी के अनुसार इस परिवार में पति दृष्टिहीन है जबकि पत्नी शारीरिक रूप से दिव्यांग है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उन्हें सरकारी दिव्यांग pension का लाभ नहीं मिल रहा है। दंपती का कहना है कि उन्होंने पंचायत स्तर पर करीब दस बार आवेदन किया लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। इसके बाद जब वे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे तो उन्हें फिर से पंचायत में ही प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई।
इस परिवार की स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि उनके चार बेटियां हैं और कई बुनियादी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड तक नहीं बन पाए हैं। दस्तावेजों की कमी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की धीमी गति उनके लिए बड़ी बाधा बन गई है।
प्रशासन का पक्ष और आधार अपडेट की समस्या
जिला प्रशासन की ओर से कहा गया है कि कई दिव्यांग हितग्राहियों की पेंशन इसलिए रुकी हुई है क्योंकि उनके आधार कार्ड या अन्य दस्तावेज अपडेट नहीं हैं। अपर कलेक्टर ने बताया कि पिछले एक महीने में कलेक्टर कार्यालय में विकलांग pension से जुड़े तीस से ज्यादा मामले आए हैं और जल्द ही इन्हें हल करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी और दस्तावेजी कमियों के कारण भुगतान प्रक्रिया अटक जाती है।
मध्यप्रदेश की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना क्या है
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना संचालित की जाती है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को न्यूनतम वित्तीय सहायता देना है। इस योजना के तहत निराश्रित वृद्ध, परित्यक्ता महिलाएं और दिव्यांगजन पेंशन के पात्र होते हैं। योजना के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांग व्यक्तियों को भी आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि वे अपनी दैनिक जरूरतें पूरी कर सकें। हालांकि जमीनी स्तर पर कई मामलों में पात्रता, दस्तावेज सत्यापन और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण लाभ मिलने में देरी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन सिस्टम लागू होने के बाद आधार लिंकिंग और डेटा अपडेट अनिवार्य होने से कई गरीब परिवारों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Burhanpur का यह मामला प्रशासन के लिए चेतावनी की तरह है कि योजनाओं की जानकारी और प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। दस्तावेज अपडेट और आधार लिंकिंग जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं को गांव स्तर पर ही आसान बनाने की जरूरत है ताकि कमजोर वर्गों को बार बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके अलावा नियमित मॉनिटरिंग, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली और पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी तय करने से ऐसी समस्याओं को कम किया जा सकता है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह सकता है।
