इंदौर में कांग्रेस पार्षदे अनवर कादरी को भाजपा परिषद के पार्षदों ने बहुमत के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया है। इस मामले में कांग्रेस का कहना है कि पार्षद पद से हटाने का अधिकार संभागायुक्त को है। वैसे भी अभी तक कादरी पर दोष सिद्ध नहीं हुआ है। मामला कोर्ट तक जा सकता है, हालांकि जब सम्मेलन में यह प्रस्ताव आया तो कांग्रेस पार्षद वॉकआउट कर सदन के बाहर चले गए थे। दो तिहाई बहुतमत के आधार पर कादरी की पार्षदी छिन ली गई।
४० बरस में पहली बार
इंदौर नगर निगम में 40 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी पार्षद को अयोग्य घोषित किया गया हो। वर्ष 1994 में महापौर मधुकर वर्मा के कार्यकाल में एक बार एक कांग्रेस पार्षद को अयोग्य घोषित करने की मांग नगर निगम कर्मचारियों ने पुरजोर तरीके से उठाई थी,क्योकि वे कर्मचारियों से गालियां देकर बातें करते थे। आपको बता दे कि अनवर कादरी पर लव जिहाद की फंडिंग सहित पंद्रह से ज्यादा आपराधिक केस विभिन्न थानों में दर्ज है। उसे अपराध की दुनिया में डकैत के नाम से भी जाना जाता है। फिलहाल वह जेल में बंद है।
अब बन सकते हैं ये आसार
पार्षद अनवर कादरी ने अपना जबाव पेश किया। उधर संभागायुक्त कार्यालय की तरफ से अभी पार्षद को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। पूर्व संभागायुक्त दीपक सिंह ने पुलिस विभाग से पार्षद के आपराधिक केसों के बारे में जानकारी मंगाई थी। इसके बाद कादरी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा गया था, लेकिन उसके बाद आगे एक्शन नहीं लिया गया। कादरी इसे आधार बनाकर कोर्ट की शरण ले सकता है।
महापौर ने कांग्रेस से पूछा सवाल
मेयर पुष्य मित्र भार्गव का कहना है कि कादरी के पार्षद बने रहने से शहर की धूमिल होती है। इस कारण हमने उन्हें हटाने का प्रस्ताव मंजूर किया, लेकिन जब इस प्रस्ताव पर चर्चा होती थी। तब कांग्रेस पार्षद अपनी बात बगैर रखे सदन छोडक़र चले गए। कांग्रेस ने कादरी के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया तो क्या यह समझा जाए कि कांग्रेस लव जिहाद का समर्थन करती है।
