आज माघी गणेश जयंती के अवसर पर पुणे के प्रसिद्ध डागडुशेठ हलवाई गणपति मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में जाना जाता है। महाराष्ट्र में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का जन्म माघ शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। इस तिथि पर गणेश पूजन को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि विवेक तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है।

माघी गणेश जयंती का धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ
पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी पार्वती द्वारा रचित बालक को भगवान शिव ने हाथी का मस्तक प्रदान कर पुनर्जीवन दिया था। इसके बाद भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूज्य का स्थान मिला। तभी से माघ शुक्ल चतुर्थी को उनके जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में माघ मास को पुण्यदायी माना गया है। इस माह में भगवान गणेश की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।
डागडुशेठ गणपति मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
माघी गणेश जयंती के अवसर पर डागडुशेठ गणपति मंदिर में सुबह से ही अभिषेक और आरती का आयोजन किया गया। गणेश जन्मोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए।
राज्यभर में उत्सव का माहौल
महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में माघी गणेश जयंती को लेकर मंदिरों और घरों में पूजा अर्चना की गई। भगवान गणेश को मोदक अर्पित किए गए और कई स्थानों पर सामूहिक आरती का आयोजन हुआ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघी गणेश जयंती के दिन पूजा करने से नए कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसी कारण इस दिन को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
