कराड। महाराष्ट्र में इन दिनों आई (65) का ऑटो रिक्शा चर्चा में है। कराड में मंगला आवले आठ महीने से ऑटो चला रही है। न जरूरत है, न कोई परेशानी… वाहवाही भी नहीं चाहिए। खाली नहीं बैठ सकतीं, इसलिए चलाना सीख लिया है। बताती हैं कि लडक़े ने खुद के लिए खरीदा था, फिर उसकी नौकरी राज्य परिवहन विभाग में बतौर ड्रायवर लग गई। रिक्शा घर के आंगन में तीन महीने से खड़ा था। मैंने उससे कहा कि चलाना सिखा दे। उसने कहा- क्या जरूरत है। लोग मुझे कहेंगे कि बूढ़ी मां से काम करवा रहा है। मैंने कहा- इसी दकियानूसी खयाल को तो खत्म करना है। सबको मैं जवाब दूंगी कि अपनी खुशी से काम कर रही हूं। लडक़े ने सिखाना शुरू किया।

पहले तीन दिन में तो हाथ-पांव धूजे
पहले तीन दिन में तो हाथ-पांव धूज रहे थे। हार नहीं मानी। पंद्रह दिन में सीख गई। लाइसेंस के लिए अर्जी दी, तो एजेंट ने कहा कि इस उम्र में नहीं बनेगा। उसे मैंने ही नियम बताया कि जब तक स्वस्थ हैं, लाइसेंस के लिए कोई उम्र सीमा नहीं है। मैं अपना मेडिकल सर्टिफिकेट देने को तैयार हूं। अगर उम्र आड़े आ रही होगी, तो नहीं बनाऊंगी।
मेडिकल सर्टिफिकेट में कोई परेशानी नहीं दिखी। बस, इतनी शर्त है कि लाइसेंस हर साल रिन्यू कराना पड़ेगा। घर के आसपास मैदान में चलाती थी, फिर एक रोज बस-स्टैंड से लडक़े का फोन आया कि मैं टिफिन घर पर भूल गया हूं, यहां तक ला दो। मैंने टालना चाहा कि बाहर कुछ खा ले… उसने कहा- टिफिन ही खाऊंगा और तुम्हें ही लेकर आना है… बस से मत आना, रिक्शा चला कर लाना। वो मेरी हिम्मत खोलना चाहता था। मैं भी नहीं डरी। चार किलोमीटर रिक्शा लेकर पहुंच गई। उस दिन के बाद आसपास चलाने लगी। परमिट और दूसरी कागजी कार्रवाई भी पूरी कर ली।
आई के साथ ही जाना चाहती हैं लड़कियां
कॉलेज की कई लड़कियां हैं, जो दूसरे रिक्शा वालों को इंकार कर, मेरे आने का इंतजार करती हैं। वो भी रिक्शा चलाना सीखना चाहती हैं। मैं उन्हें कहती हूं- बस, हिम्मत दिखाना है… किसी को जवाब नहीं देना, सिर्फ खुद के खिलाफ लड़ाई शुरू करनी है। ज्यादातर चीजों में डर ही अड़चन है। असल में तो उतनी परेशानी है ही नहीं, जितना हम सोचते हैं। कुछ यू-ट्यूबर और पड़ोस में रहने वाले ब”ाों ने मंगला के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिए। अब कई मीडिया वाले भी आ रहे और लोग भी सराह रहे हैं।
