Doctor बनने का सपना जब किसी भी कीमत पर पूरा करने की जिद में बदल जाए, तो उसके नतीजे कितने भयावह हो सकते हैं, यह मामला उसी की मिसाल है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से सामने आए इस प्रकरण ने न सिर्फ पुलिस बल्कि समाज को भी झकझोर कर रख दिया है। यहां एक युवक ने एमबीबीएस में प्रवेश को आसान बनाने के लिए खुद अपने पैर का पंजा काट लिया।
खलीलपुर गांव निवासी 25 वर्षीय सूरज भास्कर के मामले का पुलिस ने गुरुवार को राजफाश किया। जांच में सामने आया कि सूरज पर किसी ने हमला नहीं किया था, बल्कि उसने स्वयं को दिव्यांग साबित करने के उद्देश्य से यह आत्मघाती कदम उठाया था। उसका मकसद दिव्यांग कोटे के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाना था।
सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता के अनुसार सूरज डीफार्मा की पढ़ाई पूरी करने के बाद NEET की तैयारी कर रहा था। वह वर्ष 2026 में किसी भी हाल में एमबीबीएस में प्रवेश लेना चाहता था। पुलिस को जांच के दौरान सूरज की कॉल डिटेल, निजी डायरी और उसकी प्रेमिका के बयान से उसके इरादे की पूरी जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार घटना 18 जनवरी की रात की बताई गई थी। सूरज ने दावा किया था कि अज्ञात लोगों ने उस पर हमला किया, उसे बेहोश किया और उसके बाएं पैर का पंजा काटकर फरार हो गए। इस बयान के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा भी दर्ज कर लिया था।
हालांकि इलाज के दौरान और बाद में सूरज के बयान बार बार बदलते रहे, जिससे पुलिस को संदेह हुआ। इसके बाद मामले की गहराई से जांच की गई। जांच के दौरान आसपास के खेतों में तलाशी ली गई, जहां से एनेस्थीसिया की शीशी, सिरिंज, कटर और एक नोटबुक बरामद हुई। इन साक्ष्यों से यह साफ हो गया कि घटना किसी बाहरी हमले की नहीं बल्कि पूर्व नियोजित थी।
सीओ सिटी के अनुसार पंजा काटने के तरीके से स्पष्ट होता है कि इसमें किसी मशीन या धारदार उपकरण का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि कटे हुए पंजे की बरामदगी नहीं हो सकी है। पुलिस का मानना है कि बरामद इंजेक्शन एनेस्थीसिया से जुड़े हो सकते हैं, जिससे युवक ने दर्द से बचने की कोशिश की। जांच में यह भी सामने आया कि सूरज की एक प्रेमिका है, जिससे वह शादी करना चाहता है। प्रेमिका के बयान के अनुसार सूरज एमबीबीएस में प्रवेश को लेकर अत्यधिक दबाव में था। उसने पिछले वर्ष अक्टूबर में बीएचयू से दिव्यांगता से जुड़े कुछ जरूरी दस्तावेज बनवाने का प्रयास भी किया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने स्वयं दिव्यांग बनने का खतरनाक फैसला कर लिया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद भोर में करीब पांच बजे सूरज ने अपने परिवार के लोगों को फोन किया था, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। बाद में एक पट्टीदार के जरिए परिवार को घटना की जानकारी मिली। इसके बाद सूरज को इलाज के लिए बीएचयू ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जौनपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उसका ऑपरेशन किया गया है और फिलहाल उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
सीओ सिटी ने बताया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सूरज का दोबारा बयान दर्ज किया जाएगा। मामले में अब फाइनल रिपोर्ट तैयार की जा रही है और युवक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
यह मामला न केवल चिकित्सा शिक्षा में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और दबाव को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि मेडिकल प्रवेश प्रणाली में कोटे और प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को लेकर कितनी गंभीर निगरानी की आवश्यकता है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच तथ्यों के आधार पर की गई है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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