Holi को लेकर हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच उत्साह और तैयारी शुरू हो गई है। पर इस बार एक बड़ा सवाल चर्चाओं में हैं कि होली 3 मार्च को मनाई जाएगी या 4 मार्च को। यह कंफ्यूजन सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है बल्कि स्कूल, कॉलेज, ऑफिस और व्यापार जगत में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी वजह सिर्फ तारीख नहीं बल्कि चंद्र ग्रहण और धार्मिक मान्यताएँ भी हैं।
होलिका दहन और रंगों वाली होली की सही तिथि
भारतीय पंचांग के अनुसार Holi का पर्व दो हिस्सों में मनाया जाता है। पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन रंगों की Holi यानी रंगभरी होली खेली जाती है। इस साल यह पर्व अलग-अलग तिथियों को लेकर भ्रम का कारण बन रहा है।
ज्योतिष और पंचांग विशेषज्ञों के मुताबिक 2 मार्च, सोमवार की शाम से ही फाल्गुन पूर्णिमा प्रारंभ हो जाएगी। इसी पूर्णिमा के आधार पर होली की होलिका दहन परंपरा 3 मार्च, मंगलवार की रात को की जाती है। उसके अगले दिन 4 मार्च, बुधवार को रंगों वाली होली धूमधाम से मनाई जाएगी।
चंद्र ग्रहण और सूतक काल की भूमिका
इस साल Holi के ठीक अगले दिन यानी 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण लाग रहा है, जो दोपहर के समय से शाम तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण और उसके साथ जुड़े सूतक काल में किसी भी प्रकार का उत्सव, आयोजन और रंगों से खेलना वर्जित माना जाता है। इसी वजह से ज्योतिषियों का मानना है कि 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी और 4 मार्च को ही यह पर्व मनाया जाना चाहिए।
कुछ पंडितों के अनुसार होलिका दहन 2 या 3 मार्च की रात में किया जा सकता है और उसके बाद ही रंग भरी Holi का आयोजन 4 मार्च को करना उचित है ताकि धार्मिक दृष्टि से सही मुहूर्त और परंपरा का पालन हो सके।
असमंजस का असर समाज पर
इस कंफ्यूजन का असर रोजमर्रा की ज़िंदगी पर भी देखने को मिल रहा है। कई स्कूलों और कॉलेजों ने पहले से ही छुट्टियाँ घोषित करना शुरू कर दिया है जबकि कुछ सरकारी विभाग 3 मार्च की बजाय 4 मार्च को छुट्टी मांग रहे हैं। मध्य प्रदेश के कर्मचारी संघ ने भी सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर मांग की है कि होली की सरकारी छुट्टी 3 मार्च की बजाय 4 मार्च रखी जाए ताकि रंगों की होली सही दिन मनाई जा सके।
दूसरी ओर थोक बाजारों ने 3 या 4 तारीख की विवादित स्थिति को देखते हुए Holi पर तीन दिन की छुट्टी घोषित कर दी है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों और ग्राहकों के लिए सुविधा बनी रहे। वहीं स्थानीय व्यापारी संगठन शासन के दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने व्यापारिक निर्णय उसी के आधार पर ले सकें।
त्योहार का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
Holi केवल एक रंगों का पर्व नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। होलिका दहन का अनुष्ठान पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है जो समाज में नकारात्मकता और बुराइयों का मिटाना दर्शाता है। रंगभरी Holi लोगों के बीच प्रेम, भाईचारा और सौहार्द को बढाने का संदेश देती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में अनुभव
देश के अलग-अलग हिस्सों और समुदायों में Holi को मनाने का समय थोड़ा बदल सकता है। कुछ इलाकों में परंपरागत तौर पर पहले ही 3 मार्च को होली उत्सव शुरू हो जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में 4 मार्च को ही मुख्य रंगोली Holi खेली जाती है। इस तरह के अंतर से भी भ्रम और चर्चा को हवा मिल रही है।
यदि धार्मिक पंचांग और ज्योतिष की मान्यताओं के अनुसार देखा जाए तो Holi का मुख्य रंगोत्सव 4 मार्च, बुधवार को ही होगा और होलिका दहन की परंपरा 3 मार्च की रात में ही रहेगी। चंद्र ग्रहण और सूतक काल के प्रभाव के कारण 3 मार्च को रंगों वाली Holi नहीं खेली जाएगी, इसलिए पूरे देश में 4 मार्च को ही इस पर्व को सही तरीके से मनाया जाना चाहिए।
इस प्रकार इस साल Holi का असली दिन 4 मार्च को होने जा रहा है, जो सबके लिए पहले से समझ लेना जरूरी है ताकि त्योहार का आनंद बिना किसी भ्रम या परेशानी के मनाया जा सके।
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