इंदौर के एयरपोर्ट रोड पर हाल ही में हुए हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। ट्रक ने अचानक नियंत्रण खो दिया और सड़क पर जा रहे लोगों और वाहनों को टक्कर मार दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा देने और अधिकारियों से detailed analysis माँगी है। उन्होंने कहा है कि no-entry zone का पालन सकती से किया जाएगा।
लेकिन हादसे के बाद भी शहर की कई तंग और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ट्रक दिखाई दे रहे हैं। शाम और देर रात के समय जब सड़क पर सबसे ज़्यादा लोग होते हैं, उसी समय भारी वाहन नियम तोड़कर अंदर आ जाते हैं।
रात में पुलिस कार और बाइक की चेकिंग में व्यस्त रहती है, शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर कार्रवाई भी होती है, जो ज़रूरी है। लेकिन लोगों का कहना है कि ट्रकों की निगरानी भी उतनी ही ज़रूरी है। बड़े वाहनों के चलते ही सबसे गंभीर हादसे हो रहे हैं और इन्हें रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस हादसे में जान गंवाने वालों में 65 वर्षीय लक्ष्मीनारायण सोनी भी थे, जो रिटायर होने के बाद हर दिन शाम को टहलने निकला करते थे। परिवार वालों का कहना है कि वे रोज़ की तरह सड़क किनारे पैदल चल रहे थे, तभी ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। इसी तरह महेश खटवसे इलाज के दौरान दम तोड़ बैठे। उनके परिजन कहते हैं कि वह घर के लिए कुछ सामान लेने निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौट पाए। पीड़ित परिवारों के लिए यह सदमा बहुत बड़ा है।
ऐसे हादसे पहले भी हो चुके हैं। 2023 में राजबाड़ा क्षेत्र में देर रात एक ट्रॉले ने बाइक सवार को टक्कर मार दी थी। 2022 में बायपास रोड पर कंटेनर और बस की भिड़ंत में कई लोग घायल हुए थे। 2019 में छोटी ग्वालटोली क्षेत्र में बाजार के बीच डंपर घुस गया था। हर बार आश्वासन दिया गया, लेकिन हालात नहीं बदले।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक सख़्त नाकाबंदी और निगरानी नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएँ रुकना मुश्किल है। लोगों का साफ़ कहना है, “जब आदेश है तो ट्रक अंदर कैसे आते हैं? अगर हर बार मौत के बाद ही कार्रवाई होगी, तो शहर की सड़कों पर सुरक्षित महसूस करना नामुमकिन हो जाएगा।”
अगर no-entry लागू की गई है तो ट्रकों को उसमें प्रवेश नहीं करना चाहिए। इसके लिए पुलिस और प्रशासन दोनों को बराबर जिम्मेदारी निभानी होगी। साथ ही, भारी वाहनों के लिए शहर से बाहर अच्छी सड़को वाले रास्ते बनने चाहिए ताकि उन्हें शहर के बीच से नहीं जाना पड़े। लोगों की अपेक्षा यही है कि नियम केवल कागज़ों पर न रह जाएँ, बल्कि सड़क पर भी उनका पालन हो। तभी शहर की सड़कें सुरक्षित हो पाएँगी।
इंदौर smart city कहलाता है, लेकिन लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या शहर वास्तव में सुरक्षित है? अगर भारी वाहन नियमों को तोड़ते रहे और प्रशासन आंखें मूँदता रहा, तो सड़कें कब्रगाह में बदलती रहेंगी।
