केंद्र सरकार ने Kerala का नाम बदलकर ‘Keralam’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। इससे पहले 24 जून 2024 को Kerala विधानसभा ने राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया था। अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि मंत्रिमंडल ने केरल सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ‘Kerala नाम परिवर्तन विधेयक 2026’ को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत अपने विचार के लिए Kerala विधानसभा को भेजेंगी। विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद में पेश करने के लिए राष्ट्रपति की अनुशंसा लेगी। संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही नाम परिवर्तन आधिकारिक रूप से लागू होगा।
विधानसभा चुनाव से पहले लिया गया फैसला
Kerala में इस वर्ष अप्रैल में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और वर्तमान 140 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो रहा है। चुनाव से पहले लिए गए इस फैसले को लेकर सवाल भी उठे। इस पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्र सरकार निर्णय चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि राज्य और देश के हित में लेती है। उन्होंने कहा कि पहले भी केरल में रेल कॉरिडोर और वंदे भारत ट्रेन से जुड़े फैसले चुनावी माहौल से अलग समय में लिए गए थे।
पीएम मोदी और अमित शाह ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल का यह निर्णय राज्य के लोगों की इच्छा को दर्शाता है और यह राज्य की गौरवशाली संस्कृति से जुड़ाव को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केरल के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि ‘Keralam’ नाम राज्य की विरासत और पहचान को और अधिक प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करेगा तथा यह लंबे समय से चली आ रही मांग की पूर्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
क्या है प्रस्ताव का आधार
केरल विधानसभा ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि राज्य का नाम मलयालम भाषा में ‘Keralam’ है और राज्यों का गठन भाषाई आधार पर हुआ था, इसलिए आधिकारिक नाम भी स्थानीय भाषा के अनुरूप होना चाहिए। गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय और विधायी विभाग ने प्रस्ताव पर सहमति दी थी, जिसके बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया।
बंगाल में भी तेज हुई नाम बदलने की मांग
Kerala के नाम परिवर्तन को मंजूरी मिलने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राज्य का नाम बदलने के मुद्दे को फिर उठाया है। ममता बनर्जी पहले भी पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की पहल कर चुकी हैं। वर्ष 2016 में राज्य विधानसभा ने नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित किया था और 2018 में संशोधित प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था, जिसमें राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने की सिफारिश की गई थी। हालांकि उस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
ममता बनर्जी का कहना है कि जब Kerala के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है तो बंगाल के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।
नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया
भारत में किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद की मंजूरी आवश्यक होती है। संबंधित विधेयक राष्ट्रपति की अनुशंसा के बाद संसद में प्रस्तुत किया जाता है और उससे पहले संबंधित राज्य विधानसभा से राय मांगी जाती है। Kerala के मामले में यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है और बंगाल के प्रस्ताव पर भी यही संवैधानिक प्रावधान लागू होंगे।
इस प्रकार Kerala के नाम परिवर्तन के फैसले के साथ ही अन्य राज्यों में भी पहचान और भाषाई आधार पर नाम बदलने की बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
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