तेहरान में राजनीतिक हालात तेजी से बदले हैं। Iran के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद देश की सर्वोच्च सत्ता अब तीन सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद के हाथों में आ गई है। यह व्यवस्था Iran के संविधान में पहले से तय है और सुप्रीम लीडर का पद खाली होने की स्थिति में लागू होती है।
राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि नया सुप्रीम लीडर चुने जाने तक यही परिषद देश के राजनीतिक, सैन्य और रणनीतिक फैसलों का संचालन करेगी। इस अंतरिम परिषद में राष्ट्रपति के साथ न्यायपालिका प्रमुख Gholam-Hossein Mohseni-Eje’i और गार्जियन काउंसिल के धर्मविद सदस्य Alireza Arafi शामिल हैं।
Iran में सुप्रीम लीडर की भूमिका क्या होती है
1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद स्थापित शासन व्यवस्था में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है। सुप्रीम लीडर सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं और विदेश नीति, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अंतिम फैसले उन्हीं के हाथ में होते हैं। Ayatollah Ali Khamenei वर्ष 1989 से इस पद पर थे और उनके कार्यकाल में Iran की आंतरिक और बाहरी नीतियों में कई अहम बदलाव हुए।
नए सुप्रीम लीडर का चयन कैसे होगा
Iran के संविधान के अनुसार नए सुप्रीम लीडर का चयन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करेगी। यह लगभग 90 वरिष्ठ धर्मगुरुओं की संस्था है, जिसे सुप्रीम लीडर चुनने का अधिकार प्राप्त है। मौजूदा सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय तनाव के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि यह संस्था अपनी बैठक कब करेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के अमेरिकी और इजरायली हमलों में रिवोल्यूशनरी गार्ड के कई वरिष्ठ कमांडरों के मारे जाने से सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है। परंपरागत रूप से सुप्रीम लीडर के चयन में रिवोल्यूशनरी गार्ड की अहम भूमिका मानी जाती रही है।
संभावित उत्तराधिकारी कौन
राजनीतिक हलकों में अली लारीजानी को सत्ता संतुलन का अहम रणनीतिकार माना जा रहा है। संभावित नामों में मोजतबा खामेनेई, हसन खोमेनी और अलीरेजा अराफी की चर्चा भी हो रही है। हालांकि अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अयातुल्ला अलीरेजा अराफी क्यों हैं अहम चेहरा
अंतरिम नेतृत्व परिषद में अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को प्रभावशाली सदस्य माना जा रहा है। वर्ष 1959 में यज्द प्रांत के मेयबोद शहर में जन्मे अराफी धार्मिक परिवार से आते हैं। कम उम्र में वे कोम चले गए थे, जहां उन्होंने इस्लामी शिक्षा प्राप्त की और धीरे धीरे धार्मिक नेतृत्व में अपनी पहचान बनाई।
पिछले तीन दशकों में उन्होंने सेमिनरी प्रणाली के प्रमुख, गार्जियन काउंसिल के सदस्य और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य जैसे कई महत्वपूर्ण पद संभाले हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने वेटिकन में पोप फ्रांसिस से मुलाकात कर अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा दिया था।
उन्हें बहुभाषी और तकनीक के प्रति जागरूक धार्मिक नेता माना जाता है। वे अरबी और अंग्रेजी में दक्ष हैं और कई मंचों पर आधुनिक तकनीक के माध्यम से ईरानी विचारधारा को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की बात कर चुके हैं। हालांकि वर्ष 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिए गए उनके बयानों के बाद कनाडा ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे।
कुल मिलाकर खामेनेई की मौत के बाद Iran एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। अंतरिम नेतृत्व परिषद के फैसले आने वाले समय में देश की दिशा तय करेंगे और अब सबकी नजर असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की अगली बैठक पर टिकी है।
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