भारतीय क्रिकेटर केएल राहुल ने पहली बार खुलकर बताया है कि उन्होंने IPL में कप्तानी छोड़ने का फैसला क्यों लिया। लखनऊ सुपर जायंट्स के मालिक संजीव गोयनका के साथ उभरे विवाद के बाद से कई तरह की बातें सामने आई थीं, लेकिन अब राहुल की सीधी प्रतिक्रिया ने तस्वीर साफ कर दी है। उन्होंने बताया कि IPL टीम के मालिक खेल में जरूरत से ज्यादा दखल देते हैं, जिससे कप्तान पर अनचाहा दबाव बढ़ जाता है।
राहुल के अनुसार, कप्तानी के दौरान सबसे मुश्किल हिस्सा लगातार होने वाली मीटिंग और हर फैसले पर जवाब देने का बोझ था। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल क्रिकेट में कप्तानी अपेक्षाकृत आसान होती है, क्योंकि वहां कप्तान को सिर्फ रणनीति और टीम के खेल पर ध्यान देना होता है। लेकिन IPL में स्थिति बिल्कुल अलग थी। कप्तान को खिलाड़ी की तरह खेलना भी पड़ता था और साथ ही मैनेजर, रणनीतिकार और प्रवक्ता की भूमिका निभानी पड़ती थी।
उन्होंने बताया कि टीम मालिकों की ओर से पूछे जाने वाले सवाल अक्सर बेहद अजीब और गैर-जरूरी होते थे। राहुल ने खुलासा किया कि कई बार उनसे पूछा जाता था कि विरोधी टीम के गेंदबाज ज्यादा स्पिन क्यों करा रहे हैं, हमारी गेंदें स्पिन क्यों नहीं हो रहीं। बल्लेबाजी क्रम में बदलाव क्यों किया गया, किसी खिलाड़ी को प्लेइंग इलेवन में क्यों रखा या क्यों बाहर किया। यहां तक कि एक मैच में विरोधी टीम ने 200 रन कैसे बना लिए और उनकी टीम 120 भी क्यों नहीं बना पाई, इस तरह की पूछताछ लगातार जारी रहती थी।
राहुल ने कहा कि यह दवाब धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक थकान में बदल गया। दस महीने का इंटरनेशनल क्रिकेट भी इतना थकाने वाला नहीं होता, जितना आईपीएल का एक सीजन हो जाता था। उन्होंने स्वीकार किया कि कोच और कप्तान को कई बार ऐसे मालिकों से निपटना पड़ता है जिन्हें क्रिकेट की वास्तविक समझ नहीं होती। इन सब वजहों से उन्होंने अंततः IPL में कप्तानी न करने का फैसला किया।
