इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और इंदौर के दिग्गज भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय का कद लगातार घटता जा रहा है मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की नई टीम में कैलाश विजयवर्गीय के हिस्से तो कुछ नहीं आया है, पर विरोधियों को ताकत मिल गई है। गौरव रणदिवे हैं को विजयवर्गीय विरोधी होने का भरपूर फायदा रहा है। भोपाल ने साफ कर दिया है कि इंदौर में विरोध की सियासत को गौरव के जरिए बढ़ा दिया है। चिंटू वर्मा को कुर्सी से बेदखल कर दिया और मंत्री कुछ नहीं कर पाए। रमेश मेंदोला की गाड़ी भी विधायक से आगे नहीं बढ़ पा रही है और वजह मंत्री ही हैं। खंडेलवाल की टीम में इंदौर से विजयवर्गीय के करीब का कोई नहीं है।





संघ करीबी खरे पर मेहरबानी
निशांत खरे तो शिवराजसिंह के करीबी है और मुख्यमंत्री रहते बत्ती की गाड़ी में घूम चुके हैं। संघ भी मेहरबान रहता है। भगवान परमार का सियासी हाथ कोई दूसरा है। हेमंत खंडेलवाल ने टीम तो बना ली है, पर अपने किसी को दम नहीं दे पाए हैं। वैसे जो बने हैं, सब उनके हैं। फिर उनकी ताकत तो वीडी शर्मा को मिटाने में थी, जिसमें तकरीबन कामयाब रहे हैं।



गौरव की धमाकेदार वापसी
अध्यक्ष की कुर्सी जाने के बाद से गौरव रणदिवे की टीम सन्नाटे में थी। कहीं जगह नहीं मिल रही थी और जैसी ही महामंत्री बनाए गए, हंगामा था। ढोल-धमाके और पटाखे के साथ सियासी दीवाली हो गई।
इंदौर से पिछली बार कविता पाटीदार को महामंत्री बनाया था, लेकिन इतना शोर नहीं हुआ, जितना गौरव के लिए है। फिर चार नंबर में तो एकलव्य गौड़ ने जश्न की बागडोर संभाल रखी थी, जिसमें सिर्फ गौरव के लिए हंगामा नहीं था, दो नंबर को बताना था कि हेमंत खंडेलवाल के आते ही जो गैंग वजूद में आई थी, अब ताकत में है, क्योंकि सारे ही कहीं ना कहीं पहुंच गए हैं!


