धार और आसपास के जिलों में सोमवार को किसानों का आक्रोश खुले रूप में सामने आया, जब चार जिलों के पांच हजार से ज्यादा किसान राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठ गए। किसानों ने सड़क पर पेड़ रखकर Highway को रोक दिया और साफ कहा कि अब उनकी आवाज़ अनसुनी नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं मिलेगी, आंदोलन जारी रहेगा।
एमएसपी की लड़ाई और बढ़ती लागत का दर्द
यह प्रदर्शन राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के नेतृत्व में हुआ। किसानों ने बताया कि बढ़ती लागत और गिरती मंडी कीमतों के कारण खेती घाटे का सौदा बन गई है। ऐसे में MSP की कानूनी गारंटी उनके जीवन का आधार है। इससे पहले किसानों के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार के मंत्रियों से बातचीत की थी, लेकिन समाधान न निकलने पर वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए।
प्रशासन अलर्ट, किसान शांतिपूर्वक डटे रहे
पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए खलघाट क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश रोक दिया। टोल प्लाजा के पास निषेधाज्ञा लगाई गई, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इसके बावजूद किसान शांतिपूर्वक बैठे रहे और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से सामने रखा। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि अपनी जमीन, फसल और भविष्य की सुरक्षा के लिए है।
कर्ज का बोझ और अधूरे भाव की मार
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने यह भी कहा कि कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है और फसल का भाव लागत से नीचे मिलता है। ऐसे में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। वे चाहते हैं कि सरकार एमएसपी पर ठोस फैसला ले और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारे।
आंदोलन का असर और आगे की दिशा
किसानों की बढ़ती संख्या और उनकी दृढ़ता यह संकेत देती है कि इस बार आंदोलन हल्के से नहीं थमेगा। मध्यप्रदेश में खेती प्रमुख अर्थव्यवस्था का आधार है और इतने बड़े आंदोलन का असर सीधे किसानों और बाजारों तक पहुंचता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कब और कैसे किसानों की इस ऐतिहासिक मांग पर निर्णायक कदम उठाती है।
