बालाघाट। मध्यप्रदेश के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में दस महीने में दो हजार नक्सलियों ने सरेंडर किया है, लेकिन मध्यप्रदेश के हाथ खाली हैं। हमारी नक्सल सरेंडर पॉलिसी को सबसे अच्छा बताया जाता है। देश भर में तारीफ हो चुकी है। जनवरी, 2024 से अब तक छत्तीसगढ़ में हजारों सरेंडर हो गए। इस माह में ही ढाई सौ से ज्यादा ने हथियार रख दिए।
बालाघाट, मंडला और डिंडौरी
मध्यप्रदेश के तीन जिले बालाघाट, मंडला और डिंडौरी को नक्सलियों से जोड़ा जाता है। सीआरपीएफ, हॉक फोर्स, कोबरा बटालियन, एसएएफ और पुलिस काम कर रही है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं। गृह मंत्री अमित शाह ने छह महीने पहले एक्स पर लिखा था कि बालाघाट में 38 माओवादी सक्रिय हैं। मंडला में हालात सुधरने और डिंडौरी को नक्सल मुक्त बताया था।
तीन नक्सलियों के नाम
बालाघाट के तीन नक्सलियों के नाम ज्यादा सुनाई देते हैं। तेलीगोंदा का दीपक और रशिमेता के संपत और संगीता। बालाघाट के आईजी संजय कुमार का कहना है कि हमारी पॉलिसी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से बेहतर है। 1997 में नक्सल सरेंडर पॉलिसी लांच की थी।
