नई दिल्ली :
देशभर में सुर्खियों में रहा निठारी कांड का मुख्य आरोपी 19 साल बाद जेल से बाहर आ गया। नाम सुरेंद्र कोली है, जो नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर का घरेलू नौकर था। मामले में बच्चों की हत्या, दुष्कर्म सहित कई गंभीर आरोप लगे थे। सुरेंद्र कोली सुप्रीम कोर्ट से 13वें मामले में भी आरोप मुक्त करार दिए जाने के बाद बुधवार शाम सात बजकर 16 मिनट पर लुक्सर जिला जेल से रिहा हो गया। 12 अन्य मामलों में वह पहले ही आरोप मुक्त हो चुका था।
मीडिया के कैमरे उसका चेहरा देखने और आवाज सुनने के लिए तैयार खड़े थे, ठीक वैसे ही जैसे उसकी गिरफ्तारी के वक्त थे। मगर सुरेंद्र कोली ने किसी से बात नहीं की। जेल से बाहर आते समय उसके हावभाव बिल्कुल सामान्य थे। मीडिया के कैमरों से बचने के लिए वह दौड़कर अपने अधिवक्ता के साथ जेल के बाहर खड़ी कार में बैठा और रवाना हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका पर सजा रद्द कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया था, लेकिन जरूरी कागजात समय पर न पहुंच पाने के कारण मंगलवार को रिहाई नहीं हो सकी थी। बुधवार सुबह आठ बजे जेल प्रशासन को रिहाई का ऑनलाइन आदेश प्राप्त हुआ।

2006 में नाले से बच्चों के कंकाल मिलने के बाद मचा था हड़कंप
29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे स्थित नाले से आठ बच्चों के कंकाल बरामद हुए थे। इस भयावह खोज ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जांच में सामने आया कि कई बच्चों के लापता होने और निर्मम हत्या के पीछे कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली का नाम सामने आ रहा था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और मामला सनसनीखेज बन गया।

गौतमबुद्ध नगर पुलिस की प्रारंभिक जांच के 10 दिन बाद केस CBI को सौंप दिया गया था। हालांकि, एक महीने तक अभिरक्षा में रखने के बावजूद पुलिस और फोरेंसिक टीम ठोस साक्ष्य नहीं जुटा सकी। कंकालों की बरामदगी के दौरान कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और आरोपितों की मेडिकल जांच भी नहीं कराई गई। इसी जांच की खामियों का लाभ दोनों आरोपितों को अदालत से मिला, जिसके बाद वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद अब सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से बरी कर दिया गया।

