देश में हेल्थ साइंस और पैरामेडिकल शिक्षा को एक नई दिशा देने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य और सहायक स्वास्थ्य पेशा आयोग ने बड़ा निर्णय लिया है। आयोग ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 से Physiotherapy, Occupational Therapy, Optometry, Audiology, Medical Lab Technology, Radiation Technology और कई अन्य प्रमुख हेल्थ साइंस कोर्स में प्रवेश अब सीधे नहीं होगा। इन सभी कोर्स में दाखिला केवल नीट परीक्षा के आधार पर दिया जाएगा। यह फैसला लंबे समय से चली आ रही प्रवेश प्रक्रिया की असमानता और जटिलता को समाप्त करने के उद्देश्य से लिया गया है।
अब तक अलग-अलग राज्यों और संस्थानों के अपने नियम थे, जिसके कारण छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कहीं मेरिट सूची अलग बनती थी, तो कहीं प्रवेश की शर्तें बदल जाती थीं। नई व्यवस्था से देशभर में एक समान प्रवेश प्रणाली लागू होगी, जिससे चयन अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेगा। आयोग का कहना है कि एक ही राष्ट्रीय परीक्षा के माध्यम से प्रवेश होने से हेल्थ साइंस शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
जानकारों का मानना है कि इस बदलाव से पैरामेडिकल और एलाइड हेल्थ सेक्टर को मेडिकल शिक्षा के मानकों के करीब लाने में मदद मिलेगी। इससे छात्रों को भी अधिक स्पष्टता मिलेगी क्योंकि उन्हें अब अलग-अलग परीक्षाओं और जटिल प्रक्रियाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार एक समान प्रणाली से प्रशिक्षण और कोर्स संरचना भी मजबूत होगी, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी।
सरकार ने इस निर्णय को स्वास्थ्य शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार बताया है। नई प्रवेश प्रणाली 2026 से लागू होगी और इसके तहत सभी संबंधित संस्थान केवल नीट स्कोर को ही आधार मानेंगे। शिक्षा जगत इस बदलाव को एक साहसिक कदम मान रहा है, जिससे भविष्य में हेल्थ साइंस क्षेत्र अधिक संगठित और गुणवत्तापूर्ण बन सकेगा।
