‘बिहार में वोटर-लिस्ट में सुधार के नाम पर चुनाव आयोग मजाक कर रहा है। एक घर में 947 वोटर के नाम सामने आए हैं। मकानों पर नंबर तक नहीं हैं।’
एक्स पर पोस्ट में कांग्रेस ने कहा कि आयोग चमत्कार कर रहा है। निडानी में मकान नं. 6 में 947 वोटर पाए गए हैं। आयोग ने वोट-चोरी की है। बूथ लेवल अफसर घर-घर जाकर लिस्ट चेक कर रहे हैं, फिर 947 वोटर कहां से आ गए। राहुल गांधी ने कहा कि यह साधारण गलती नहीं है। एक छोटे से गांव के एक मकान में वोटर की इतनी बड़ी संख्या बता दी गई, तो देश भर में क्या हालत होगी। राहुल ने कांग्रेस के ट्विट को री-ट्विट कर कहा है कि आयोग का कमाल देखिए, एक घर में पूरा गांव बसा दिया। आयोग ने गांव के कई मकानों पर नंबर नहीं होने का कह कर पल्ला झाड़ लिया है।
तीन लाख वोटर्स को नोटिस, कागज ठीक नहीं
बिहार विधानसभा चुनाव में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (एस.आइ.आर.) पर चुनाव आयोग ने तीन लाख वोटर्स को नोटिस देकर सात दिन में जवाब मांगा है। आयोग के खिलाफ विपक्ष के दल एकजुट हो गए हैं। वोटर्स को नोटिस देने की बजाय आयोग को खुद दस्तावेज सुधरवाना था, जबकि वोटरों को शक के घेरे में डाल कर उनकी नागरिकता पर सवाल उठाया जा रहा है। उनसे सबूत मांगे जा रहे हैं कि वे भारत के नागरिक हैं या नहीं। सभी वोटर अपने विधानसभा क्षेत्र में मतदाता के बतौर रजिस्टर्ड हैं। आयोग के मुताबिक 24 जून को 7.89 लाख वोटर रजिस्टर्ड थे, जिन्हें 25 जुलाई तक जरूरी दस्तावेज जमा करने थे। आयोग को 7.24 करोड़ फार्म वोटर्स से मिले थे, इनमें 65 लाख की मौत हो चुकी थी या वे घर छोड़ कर कहीं और जा चुके थे। बिहार में 2003 में वोटर लिस्ट की जांच हुई थी। गैर-कानूनी तौर पर बसे लोगों को छांट दिया था। अब 1987 से दो दिसंबर, 2004 के बीच पैदा हुए लोगों के माता-पिता से सबूत मांगा जा रहा है। आयोग की गलती का खामियाजा वोटर्स को भुगतना पड़ सकता है। लाखों लोग वोटिंग नहीं कर पाएंगे।
