दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट के बाद एक्शन जारी है। इस मामले की जांच NIA कर रही है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है। इस ब्लास्ट की कहानी हुंडई i20 कार के इर्द-गिर्द घूम रही है। उस कार को कई बार बेचा – खरीदा गया था। अब बेचने वाला मालिक पकड़ा गया है। इस कार डीलर ने फरीदाबाद में बकायदा सेकंड हैंड शोरूम खोल रखा था और उसने ही इस हुंडई आई 20 कार बिकवाई थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ जारी है।
वैसे फरीदाबाद से लेकर पुलवामा तक कई हाथों से गुजरे वाहनों का ही उपयोग अक्सर ऐसी आतंकी घटनाओं में उपयोग किए जाते हैं। आतंकियों के लिए पुरानी गाड़ियां न सिर्फ सस्ते साधन हैं बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचने का आसान रास्ता भी हैं। आतंकी संगठन सेकेंड हैंड वाहनों को जानबूझकर कवर्ड ट्रांसपोर्ट के रूप में इस्तेमाल करते हैं ताकि उनकी असली गतिविधियां और नेटवर्क छिपे रहें। फर्जी दस्तावेज, नकली पते और कई बार मालिकी बदलने से वाहन समय-समय पर अजनबियों के हाथों से गुजरता है। इससे सीडीआर, टोल-रिकॉर्ड और सीसीटीवी ट्रेल जोड़कर असली कड़ी तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
दिल्ली में अराजकता फैलाने के लिए पहले भी होता रहा है पुरानी गाडियों का उपयोग
30 दिसंबर 1997
पंजाबी बाग फ्लाईओवर पर चलती डीटीसी बस में सीट के नीचे जबरदस्त धमाका हुआ। इस धमाके में चार यात्रियों की मौत और 30 लोग घायल हो गए थे। बाद की जांच में पता चला कि बस को निजी ऑपरेटर से लेकर उसमें बदलाव कर आतंकी हमले के लिए इस्तेमाल किया गया था।
18 जून 2000
ताजा ब्लास्ट से 25 साल पहले नहीं लाल किले वाले इलाके को टार्गेट किया गया था। तब पार्किंग क्षेत्र में दो बड़े धमाके हुए थे। रिमोट कंट्रोल बॉम्ब टाटा सूमो या जीप में रखा गया था। उस ब्लास्ट में दो लोगों की मौत हुई और 10 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। जांच से पता चला कि गाड़ी जम्मू क्षेत्र से चोरी की गई थी। बाद में इसे आतंकियों ने उपयोग किया।
29 अक्तूबर 2005
दिल्ली के सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में हुए तीन सीरिअल ब्लास्ट हुए थे। इन धमाकों में से एक गोविंदपुरी की खड़ी कार में हुआ था। विस्फोटक सेकंड हैंड कार में टाइमर से लगाया गया था। यह कार भी फर्जी नाम और पते से खरीदी गई थी। धमाकों में 59 लोगों की जान गई और 100 से अधिक घायल हुए थे।

13 सितंबर 2008
गफ्फार मार्केट में खड़ी सफेद मारुति 800 में रखे टाइम बम से जबरदस्त धमाका हुआ था। धमाके में 20 से अधिक लोगों की मौत और 90 से ज्यादा घायल हुए थे। धमाके में उपयोग हुई पुरानी कार नोएडा से फर्जी दस्तावेज पर खरीदी गई थी, जिसे विस्फोट से कुछ घंटे पहले ही बाजार के पास पार्क किया गया था।

