चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट के नए चीफ-जस्टिस सूर्यकांत ने ऐसे स्कूल में पढ़ाई की है, जहां बैठने को भी कुछ नहीं था। हरियाणा के पेटवाड़ गांव में खेत में काम करते हुए बड़े भाई ऋषिकांत (70) को कही वो बात आज भी याद है। पसीना बह रहा था, तब सूर्या (सूर्यकांत) ने कहा कि मैं अपनी जिंदगी बदल दूंगा। उसने तब मैट्रिक पास किया था।
गांव और परिवार वाले सूर्र्या ही कहते हैं। बिना साज-स”ाा वाले उस घर में बधाई संदेश का तांता लगा है। चचेरे भाई रामदिया बताते हैं कि भले ही छोटा किसान हूं, लेकिन सूर्या का प्यार मेरे लिए कम नहीं हुआ।
बचपन के दोस्तों ने सुनाए किस्से
बचपन के दोनों दोस्त सतबीर शर्मा और फूल कुमार से आज भी रिश्ता है। सतबीर सेना में रहे और फूल कुमार किसान हैं। सतबीर बताते हैं कि हमारे स्कूल की फीस 10 रुपए थी। न बेंच थी, न ही टाटपट्टी… बोरी बिछा कर बैठते थे। फूल कुमार बताते हैं कि मैं नौवीं में दो बार फेल हुआ।
जस्टिस सूर्यकांत पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं।
कॉलेज प्रोफेसर से शादी
उनका गांव हिसार से 50 किलोमीटर दूर है। शादी, कॉलेज में प्रोफेसर सविता शर्मा से हुई। उनके एक भाई डॉक्टर हैं। दो टीचर हैं। पिता चाहते थे कि सूर्या कानून की डिग्री लें, इसलिए उनका सपना पूरा किया। उनकी दोनों लड़कियां भी कानून की पढ़ाई कर रही हैं। शादी में शर्त रखी थी कि दहेज में चम्मच भी नहीं लूंगा। पेटवाड़ गांव की सरपंच उर्मिला कहती हैं कि आज उनकी वजह से हमारे गांव का नाम रोशन हो गया।
