बीते कई दिनों से अभिनेत्री गिरिजा ओक सोशल मीडिया पर काफी वायरल हैं। ओक का यूट्यूब पर एक पाडकॉस्ट आया जिसमें उन्होंने एक नीली साड़ी पहनी हुई है। इस इंटरव्यू का वीडियो काफी वायरल हुआ। उनकी सादगी भरी मुस्कान, खूबसूरती और कॉन्फिडेंस ने सबको इम्प्रेस कर दिया और मात्र एक दिन में ही ट्विटर पर हैशटैग #GirijaOak ट्रेंड करने लगा। लेकिन अचानक से मिली यही पॉपुलरिटी उनकी परेशानी बन गई और उन्होंने एक वीडियो बनाकर चिंता भी जताई।
आज हम जिस शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं। उन्हें भी उनकी सुंदरता और आत्मविश्वास के लिए जाना जाता था। उनके जीवन में भी एक साड़ी बेहद महत्वपूर्ण थी। उनका भी उस समय न सिर्फ भारत ब्लकि दुनिया भर में ऐसा ही क्रेज था लेकिन फिर भी उन्होंने ग्लैमरस लाइफ को छोड़ एक गुमनाम जिंदगी और समाज सेवा में जीवन लगा दिया।
हम बात कर रहे हैं रीता फारिया की जिन्होंने आज ही के दिन यानी 17 नवंबर 1966 को मिस वर्ल्ड का खिताब जीता था। मिस वर्ल्ड बनने वाली वह पहली भारतीय और एशियाई महिला थीं।
दुनियाभर में तीन सबसे अहम अंतराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताएं हैं…मिस यूनिवर्स, मिस वर्ल्ड और फिर मिस अर्थ। तीनों ही प्रतियोगिताओं में भारत ने अपनी दावेदारी दिखाई और ऐश्वर्या राय बच्चन, सुष्मिता सेन, प्रियंका चोपड़ा जैसे कई नामों ने जीत का सहरा भी पहना है।
रीता फारिया ने सबसे पहले मिस बॉम्बे क्राउन जीता था। इसके बाद उन्होंने फेमिना मिस इंडिया कॉन्टेस्ट में भाग लिया। 1966 में रीता ने मिस वर्ल्ड में भाग लिया और जीत गईं। रीता सौंदर्य के अंतराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम दर्ज करवाने वाली पहली भारतीय महिला हैं। रीता ऐसी इंडियन मॉडल थी जिनका क्रेज़ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, आयरलैंड में लोगों के सिर चढ़कर बोलता था। लेकिन कुछ समय तक मॉडलिंग करने के बाद उन्होंने डॉक्टरी करने का फैसला किया और ग्लैमरस लाइफ छोड़कर अब गुमनामी में जिंदगी बिता रही हैं।
रीता फारिया का जन्म मुंबई के माटुंगा में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा भी मुंबई में ही पूरी की। इसके बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई के लिए ग्रांट मेडिकल कॉलेज और सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल से शिक्षा हासिल की। बाद में उन्होंने लंदन के किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल से भी पढ़ाई की।
मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान, एक दिन रीता के दोस्तों ने मजाक में उनसे कहा कि वह ब्यूटी शो में हिस्सा लें। रीता ने इसे चुनौती के तौर पर लिया और ईव्स वीकली मैगजीन द्वारा आयोजित मिस बॉम्बे प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
उन्होंने आयोजकों को अपनी तस्वीरें भेजी थीं, लेकिन तब ये नहीं सोचा था कि ये उनके सफर की शुरुआत बनेगी। मिस बॉम्बे का खिताब जीतना उनके सफर का पहला कदम था। इसके बाद 1966 में उन्होंने ईव की मिस इंडिया प्रतियोगिता भी जीत। मिस बॉम्बे के लिए उन्हें 5,000 रुपये और मिस इंडिया के लिए 10,000 रुपये का इनाम मिला। उन्होंने ये पैसे अपनी मां को दिए, जो उस वक्त मुंबई के एक अनाथालय में एक बच्चे की देखभाल करती थीं।
उधार की साड़ी ने किया कमाल
रीता ने एक बार इंटरव्यू में बताया कि उनके पास न तो कोई कोई ट्रेनिंग थी, न ही अच्छे और महंगे कपड़े. यहां तक कि उनका पासपोर्ट भी नहीं बना था। लंदन जाने के लिए उन्होंने दोस्तों से साड़ी और स्विमसूट उधार लिए थे। उनकी मेकअप किट में केवल कुछ लिपस्टिक थीं और पर्स में सिर्फ तीन पाउंड थे। लंदन पहुंचने पर, रीता को लगा कि बाकी कंटेस्टेंट्स उनसे ज्यादा ग्लैमरस और अनुभवी हैं। लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास दिखाते हुए मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।
साथ ही, साड़ी में सबसे अलग दिखने के लिए ‘बेस्ट इन इवनिंग वियर’ और ‘बेस्ट इन स्विमसूट’ का खिताब भी जीता। मिस वर्ल्ड के ग्रैंड फिनाले में जब रीता से पूछा गया कि वे डॉक्टर क्यों बनना चाहती हैं? तो उन्होंने जवाब दिया था कि भारत को चाइल्डबर्थ और स्त्री रोग विशेषज्ञों की जरूरत है। इस पर ज्यूरी ने मजाकिया अंदाज में बताया, ‘भारत में तो बहुत बच्चे पैदा होते हैं’। रीता ने फौरन जवाब दिया, ‘यही तो हमें कम करना है
अब कहां हैं रीता?
रीता फारिया ने 1971 में अपने मेंटॉर, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डेविड पॉवेल से शादी कर ली थी। 1973 में वह अपने पति और दो बेटियों के के साथ डबलिन शिफ्ट हो गईं।
वहां उन्होंने मेडिकल प्रैक्टिस शुरू की और सफलतापूर्वक अपना करियर बनाया। ग्लैमर की दुनिया से दूर होकर भी उन्होंने वास्तविक जीवन में लोगों की सेवा करने का अपना सपना पूरा किया। वह बाद में मिस वर्ल्ड और फेमिना मिस इंडिया जैसी प्रतियोगिताओं में जज के तौर पर भी शामिल हुई हैं।
