नाबालिग गर्भावस्था में चिंताजनक वृद्धि
मध्यप्रदेश के इंदौर जिले से एक गंभीर और हैरान करने वाली स्थिति सामने आयी है। यहां पिछले एक वर्ष में अठारह वर्ष से कम उम्र की गर्भवतियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कुल एक सौ सतासी मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें लड़कियों की उम्र चौदह से सत्रह वर्ष के बीच थी।
कई जिलों से आ रही नाबालिग लड़कियां
धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खंडवा, खरगोन और बुरहानपुर जैसे जिले इन मामलों के प्रमुख स्रोत बनकर सामने आए हैं। इन जिलों से नाबालिग लड़कियों को इंदौर लाया जा रहा है जहां उनकी सोनोग्राफी, प्रसव या गर्भपात की प्रक्रियाएं कराई जा रही हैं। यह बढ़ती संख्या प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
कानूनी जानकारी छिपा रहे अस्पताल
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि अधिकांश अस्पताल ऐसे मामलों की सूचना पुलिस या बाल कल्याण समिति को नहीं दे रहे। कानून के अनुसार नाबालिग गर्भावस्था से जुड़े हर मामले की जानकारी देना आवश्यक है। ऐसा न करना पॉक्सो कानून और किशोर न्याय अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।
रिपोर्ट ने उजागर किए बाल विवाह के मामले
इंदौर जिला एडवायजरी बोर्ड की रिपोर्ट से पता चला है कि सोलह और सत्रह वर्ष की कई गर्भवती लड़कियों के दस्तावेजों में पति का नाम दर्ज मिला। इससे यह स्पष्ट होता है कि इनका बाल विवाह कराया गया था। हाल ही में महू में दो नाबालिग लड़कियां गर्भवती पाई गईं जिनकी उम्र चौदह और सोलह वर्ष थी तथा वे आलीराजपुर और झाबुआ की थीं।
राज्य में कम उम्र विवाह की बड़ी समस्या
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार मध्यप्रदेश में अब भी तेईस प्रतिशत महिलाओं का विवाह अठारह वर्ष से पहले हो जाता है। इस स्थिति के कारण कम उम्र में गर्भावस्था तेजी से बढ़ रही है। इंदौर की बाल कल्याण समिति ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला और बाल विकास विभाग के आयुक्त और कलेक्टर को पत्र भेजकर त्वरित जांच और कार्रवाई की मांग की है।
