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Reading: Baglamukhi Jayanti पर जागती है स्तंभन की अद्भुत ऊर्जा
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Religion

Baglamukhi Jayanti पर जागती है स्तंभन की अद्भुत ऊर्जा

शत्रु की वाणी और बुद्धि को रोक देने वाली देवी की आराधना का दुर्लभ दिन

Last updated: अप्रैल 24, 2026 3:22 अपराह्न
By Divisha 6 महीना पहले
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7 Min Read
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Baglamukhi Jayanti हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण तांत्रिक और शक्ति उपासना पर्वों में से एक मानी जाती है। यह दिन वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है और इस दिन मां बगलामुखी की विशेष पूजा की जाती है। देवी बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवां स्थान प्राप्त है और इन्हें पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इनका संबंध पीले रंग से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी की उपासना करने से व्यक्ति को न केवल शत्रुओं पर विजय मिलती है बल्कि जीवन में चल रही बाधाएं भी समाप्त होती हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो न्यायिक विवादों, शत्रु बाधा, मानसिक तनाव या जीवन में अस्थिरता का सामना कर रहे होते हैं। Baglamukhi Jayanti केवल एक पूजा का दिन नहीं बल्कि यह शक्ति, नियंत्रण और आत्मबल के जागरण का अवसर है। इस दिन साधक देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्र, हवन और तांत्रिक साधना करते हैं।

मां Baglamukhi की उत्पत्ति की रहस्यमयी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय सृष्टि पर भयंकर संकट आ गया था। चारों ओर तेज तूफान और विनाशकारी शक्तियां सक्रिय हो गई थीं जिससे समस्त जगत के नष्ट होने का खतरा उत्पन्न हो गया था। तब भगवान विष्णु ने इस संकट से मुक्ति के लिए तपस्या की।

उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने सौराष्ट्र क्षेत्र के हरिद्रा सरोवर से पीले प्रकाश के रूप में प्रकट होकर Baglamukhi रूप धारण किया। देवी ने अपनी शक्ति से उस विनाशकारी तूफान को रोक दिया और सृष्टि की रक्षा की।

एक अन्य कथा के अनुसार मदन नामक असुर को वरदान प्राप्त था कि उसकी वाणी सत्य हो जाएगी। इस शक्ति का दुरुपयोग करते हुए उसने तीनों लोकों में आतंक फैलाना शुरू कर दिया। तब देवी Baglamukhi प्रकट हुईं और उन्होंने उसकी जीभ पकड़कर उसकी वाणी को निष्क्रिय कर दिया। यही कारण है कि देवी को शत्रु की वाणी और बुद्धि को स्तंभित करने वाली देवी कहा जाता है।

स्तंभन शक्ति का गूढ़ रहस्य

मां Baglamukhi की सबसे प्रमुख शक्ति स्तंभन मानी जाती है। स्तंभन का अर्थ होता है रोक देना या स्थिर कर देना। यह केवल बाहरी शत्रुओं को रोकने तक सीमित नहीं है बल्कि यह व्यक्ति के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा को भी शांत करने की क्षमता रखती है।

मान्यता है कि देवी की कृपा से व्यक्ति के विरोधी उसकी हानि करने में असमर्थ हो जाते हैं। कोर्ट केस, विवाद, राजनीति या प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में यह शक्ति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। तांत्रिक साधनाओं में Baglamukhi साधना को अत्यंत शक्तिशाली और शीघ्र फल देने वाली माना गया है। यह शक्ति केवल आक्रमण नहीं बल्कि संरक्षण का भी प्रतीक है। देवी यह सिखाती हैं कि कभी कभी विजय पाने के लिए शत्रु को समाप्त करना जरूरी नहीं होता बल्कि उसकी शक्ति को निष्क्रिय कर देना ही पर्याप्त होता है।

मां Baglamukhi की सोलह दिव्य शक्तियां

धार्मिक ग्रंथों में मां बगलामुखी को सोलह विशेष शक्तियों से युक्त बताया गया है। ये शक्तियां केवल बाहरी संसार में विजय दिलाने के लिए नहीं बल्कि व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

इन शक्तियों में मंगला जो शुभ फल देती है, स्तंभिनी जो शत्रु की वाणी को रोकती है, मोहिनी जो आकर्षण उत्पन्न करती है, वश्या जो नियंत्रण प्रदान करती है, भ्रामिका जो भ्रम उत्पन्न करती है और कालकर्षिणी जो समय को प्रभावित करती है शामिल हैं। इनके अतिरिक्त जृम्भिणी, विद्वेषिणी, उन्मादिनी जैसी शक्तियां भी बताई गई हैं जो व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों से बचाने का कार्य करती हैं। इन सभी शक्तियों का समन्वय मां Baglamukhi को एक अत्यंत प्रभावशाली और रहस्यमयी देवी बनाता है।

पूजा विधि और विशेष अनुष्ठान

Baglamukhi Jayanti के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन साधक प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थल को भी पीले रंग से सजाते हैं। हल्दी, पीले पुष्प, चने की दाल और बेसन के लड्डू देवी को अर्पित किए जाते हैं।

मंत्र जाप इस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। ॐ ह्लीं Baglamukhi नमः मंत्र का जाप अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। कई साधक इस दिन विशेष हवन और तांत्रिक अनुष्ठान भी करते हैं। दान का भी इस दिन विशेष महत्व है। पीली वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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प्रमुख मंदिर और आस्था का केंद्र

भारत में मां Baglamukhi के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां इस दिन विशेष पूजा आयोजित होती है। मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीतांबरा पीठ और नलखेड़ा का मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित मंदिर भी अत्यंत प्रसिद्ध है। इन स्थानों पर Baglamukhi Jayanti के अवसर पर भव्य आयोजन होते हैं और वातावरण पूरी तरह से भक्ति और ऊर्जा से भर जाता है।

आधुनिक समय में Baglamukhi Jayanti की प्रासंगिकता

आज के समय में जब जीवन में प्रतिस्पर्धा और तनाव बढ़ रहा है, बगलामुखी जयंती का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यह मानसिक संतुलन और आत्मबल को मजबूत करने का भी माध्यम है।

लोग इस दिन केवल शत्रु नाश की कामना नहीं करते बल्कि अपने भीतर की नकारात्मकता को समाप्त करने का संकल्प भी लेते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में संतुलन और संयम बनाए रखना कितना आवश्यक है।

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