बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन को एक और बड़ा झटका लगा है। चुनाव सर पर है लेकिन कांग्रेस-आरजेडी-लेफ्ट आपस में उलझे पड़े हैं। इस बीच सीट शेयरिंग से नाराज हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने घोषणा की कि वो बिहार में चुनाव नहीं लड़ेगी।
ये विवाद तब शुरू हुआ जब 11 अक्टूबर को झामुमो ने राष्ट्रीय जनता दल को अल्टीमेटम दिया और 14 अक्टूबर तक ‘सम्मानजनक संख्या में सीटें’ देने की मांग की। कथित तौर पर 12 सीटें जेएमएम ने मांगी थी। पार्टी ने चेतावनी दी थी कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो वो अपना फैसला खुद लेगी।
चुनाव न लड़ने वाली घोषणा के एक दिन पहले ही JMM ने छह उम्मीदवारों सहित स्टार प्रचारकों की लिस्ट तक जारी कर दी थी। जिसमें हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी कल्पना, दुमका विधायक बसंत सोरेन और वरिष्ठ नेता स्टीफन मरांडी और सरफराज अहमद का नाम था। झामुमो ने घोषणा की थी कि वो चकाई, धमदाहा, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती से चुनाव लड़ेगी। पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा था कि पार्टी ने बिहार चुनाव अपने दम पर लड़ने का फैसला किया है। जेएमएम ने घोषणा की थी कि वो चुनाव के बाद झारखंड में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के साथ अपने गठबंधन की समीक्षा करेगी।
इन चुनावों में झामुमो के महागठबंधन का हिस्सा न होने का खामियाजा अब एलायंस को भुगतना पड़ेगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया था कि सीट बंटवारे की बातचीत के दौरान झामुमो को दरकिनार कर दिया गया, जबकि उसने महागठबंधन के सभी घटक दल खासतौर से आरजेडी और कांग्रेस से राजद से संपर्क किया था क्योंकि वो वहां सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी है। उन्होंने कहा, ‘उनके माध्यम से हमने अपनी चिन्हित सीटों के बारे में कांग्रेस आलाकमान से संपर्क किया, जहां हमारे कार्यकर्ता लंबे समय से जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के खिलाफ लड़ रहे हैं। झारखंड में हमने 2019 में आरजेडी और कांग्रेस का समर्थन किया। हमने उन्हें अपनी सीटें दीं।
