गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वाड ने एक गंभीर साजिश का पर्दाफाश किया है जिसमें एक हैदराबाद निवासी चिकित्सक समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि गिरोह ने बेहद विषैला रासायनिक एजेंट रिसिन बनाने की तैयारी की थी और इसके साथ हथियारों और जनसंख्या वाले स्थानों के निरीक्षण का भी प्रयास किया गया था।
पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान डॉ अहमद मोहियुद्दीन सय्यद, अज़ाद सुलैमान शेख और मोहम्मद सुहैल मोहम्मद सलीम खान के रूप में की है। जांच में पाया गया है कि डॉ सय्यद के पास से दो ग्लॉक पिस्टल, एक बेरेटा पिस्टल, तीस जीवित कारतूस और चार लीटर के आसपास कैस्टर ऑयल बरामद हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि कैस्टर ऑयल रिसिन बनाने में उपयोग होने वाली कच्ची सामग्री में से एक है।
जांच एजेंसियों के अनुसार पकड़ी गई सामग्री केवल हथियारों तक सीमित नहीं थी बल्कि रासायनिक तैयारी भी शुरू की गई थी। शुरुआती आरोपों में यह भी कहा गया है कि आरोपी विदेश में बैठे हैंडलर से संपर्क में थे और उनकी कड़ी अफगानिस्तान आधारित इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत से जुड़ी हुई प्रतीत होती है। इस संबंध में जांच एजेंसियां अतिरिक्त छानबीन कर रही हैं।
शहरों में निरीक्षण और योजना का दायरा:
पुलिस को घटनास्थल निरीक्षण रिपोर्ट और मोबाइल फोन के डेटा से जानकारी मिली कि आरोपी दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे शहरों में भीड़भाड़ वाले बाजारों और संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर रहे थे। अधिकारियों का मानना है कि वे संभावित निशानों की सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ के पैटर्न समझने की कोशिश कर रहे थे। इस पर आगे भी विस्तृत जांच जारी है।
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में फरीदाबाद से ३५० किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद होने की सूचना भी आई है और इस संबंध में अलग से बड़ी बरामदगी की खबरें प्रकाशित हुई हैं। यह मामला कई मीडिया संस्थानों ने कवर किया है परन्तु उपलब्ध सूचनाओं से यह साफ नहीं होता कि फरीदाबाद की बरामदगी और गुजरात ATS द्वारा पकड़ी गई रिसिन साजिश एक ही नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं या ये अलग अलग घटनाएँ हैं। इसलिए इस भाग पर अभी पुष्टि के लिए और जांच की जरूरत है।
FIR में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े विभिन्न धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं और गिरफ्तार व्यक्तियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। जांच अधिकारी फिलहाल इस नेटवर्क के अन्य संभावित संदिग्धों, फंडिंग के स्रोत और हथियार आपूर्ति चैनलों की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं। अदालत और जांच एजेंसियों द्वारा आगे की विस्तृत रिपोर्ट बाद में सार्वजनिक की जाएगी।
यह मामला यह बताता है कि आज किसी भी स्थान पर सामान्य दिखाई देने वाली गतिविधियाँ भी खतरे की ओर इशारा कर सकती हैं। नागरिक सतर्कता, सूचना तंत्र का सुदृढ़ होना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का आपसी समन्वय ही ऐसी साजिशों को समय रहते पकडऩे में निर्णायक भूमिका निभाता है। सुझाव रहेगा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी असामान्य हरकत की जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन या पुलिस को दी जाए।
