इंदौर की 38 वर्षीय हाईकोर्ट वकील अभिजिता राठौर ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल पेश की। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लिया, जिससे आठ लोगों को नई ज़िंदगी की सौगात मिली।
अभिजिता का लिवर, दोनों किडनी, कॉर्निया और त्वचा दान की गई। उनका लिवर सीएचएल हॉस्पिटल में 50 वर्षीय पुरुष को ट्रांसप्लांट किया गया। पहली किडनी जुपिटर हॉस्पिटल में 35 वर्षीय महिला को दी गई, जबकि दूसरी किडनी चोइथराम हॉस्पिटल में 27 वर्षीय पुरुष को प्रत्यारोपित की गई। इसके अलावा उनकी कॉर्निया और त्वचा भी दान की गई, जिससे कई अन्य लोगों को नई उम्मीद मिली।
अभिजिता राठौर को शनिवार को ब्रेन हेमरेज के बाद सीएचएल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उपचार के दौरान उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद पति प्रवीण राठौर और परिवार ने गहन विचार के बाद अंगदान के लिए सहमति दी। प्रवीण ने कहा कि अभिजिता हमेशा दूसरों की मदद करने में विश्वास रखती थीं, इसलिए यह निर्णय उनकी भावनाओं के अनुरूप ही था।
अस्पताल प्रशासन ने तुरंत ग्रीन कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया शुरू की। रविवार को शहर में 65वां ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया, जिसकी मदद से अंगों को सुरक्षित और तेज़ी से तीन अलग-अलग अस्पतालों तक पहुँचाया गया। इस प्रक्रिया में पुलिस और प्रशासन ने सहयोग किया।
अभिजिता के परिवार ने अंगदान के पहले अस्पताल में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की और प्रार्थना की कि उनके अंग जिन लोगों तक पहुँचें, उन्हें नई शुरुआत का वरदान मिले। परिजनों ने बताया कि अभिजिता जीवनभर ज़रूरतमंदों की मदद के लिए तैयार रहती थीं और उन्होंने हमेशा समाज के लिए काम करने का सपना देखा था।
परिवार की काउंसलिंग के बाद उन्हें बताया गया कि अब अभिजिता को कोमा से लौटने की संभावना नहीं है। इस स्थिति में उन्होंने अंगदान का निर्णय लिया ताकि किसी और की ज़िंदगी बचाई जा सके। अंगदान के इस निर्णय से अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। इस ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था में 13 हजार से अधिक ऑर्गन डोनेशन के प्रयासों में योगदान देने वाली संस्थाओं ने भी सक्रिय सहयोग किया। इंदौर में यह पाँच महीने बाद बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर था।

अभिजिता राठौर का यह निर्णय सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह सिखाया कि इंसान मृत्यु के बाद भी जीवन बाँट सकता है। आज उनकी याद में सिर्फ शोक नहीं, बल्कि गर्व भी महसूस किया जा रहा है, क्योंकि अभिजिता ने जाते-जाते आठ घरों में नई रोशनी जगा दी।
