Indore में किन्नर समाज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया है। महामंडलेश्वर मां पवित्रानंद गिरी ने जिला प्रशासन से किन्नरों द्वारा लिए जाने वाले नेक की दर निर्धारित करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्पष्ट दर तय होने से त्योहारों, विवाह और बच्चों के जन्म जैसे अवसरों पर होने वाले विवादों को रोका जा सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से प्रदेश में किन्नर कल्याण बोर्ड के गठन की अपील भी की है।
नेक की दर तय करने की मांग क्यों
Indore शहर में लंबे समय से यह स्थिति देखी जा रही है कि विभिन्न सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में किन्नर समाज के सदस्य नेक लेने के लिए पहुंचते हैं। कई बार राशि को लेकर नागरिकों और किन्नरों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। मां पवित्रानंद गिरी का कहना है कि यदि जिला प्रशासन द्वारा एक निश्चित दर निर्धारित कर दी जाए, तो इस प्रकार की असहज स्थितियों और विवादों से बचा जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक अपनी सुविधा और प्रसन्नता के अनुसार राशि देकर किन्नर समाज को अपनी खुशियों में शामिल करते हैं, लेकिन स्पष्ट दिशा निर्देश न होने से कई बार मतभेद बढ़ जाते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था बनाई जाना आवश्यक है।
किन्नर कल्याण बोर्ड गठन की मांग
मां पवित्रानंद गिरी ने प्रदेश सरकार से किन्नर कल्याण बोर्ड के गठन की मांग करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्यों में यह बोर्ड पहले ही गठित किया जा चुका है। वहां किन्नर समाज के सामाजिक, स्वास्थ्य और आर्थिक हितों के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मध्य प्रदेश में अभी तक इस प्रकार का कोई औपचारिक बोर्ड नहीं बना है। उनका कहना है कि किन्नर समाज के उत्थान, सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए राज्य स्तर पर एक समर्पित बोर्ड की आवश्यकता है। इससे न केवल योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान के लिए एक सशक्त मंच भी उपलब्ध होगा।
स्वास्थ्य और सामाजिक पहल
महामंडलेश्वर ने बताया कि उनके स्तर पर किन्नर समाज के लोगों के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इसके लिए एक एनजीओ के माध्यम से कार्य किया जा रहा है, ताकि समाज के सदस्यों को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उनका कहना है कि किन्नर समाज लंबे समय से सामाजिक उपेक्षा का सामना करता आया है। ऐसे में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में संगठित प्रयासों की आवश्यकता है।
नई पीढ़ी की बदलती सोच
मां पवित्रानंद गिरी ने यह भी कहा कि किन्नर समाज की नई पीढ़ी पारंपरिक तरीके से ताली बजाकर धन एकत्र करने में रुचि नहीं रखती। वे नौकरी, स्वरोजगार और अन्य व्यवसायिक गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। बदलते समय के साथ समाज के भीतर भी नई सोच विकसित हो रही है।
उनका मानना है कि यदि सरकार और प्रशासन सहयोग करें, तो किन्नर समाज के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना आसान हो सकता है। रोजगार के अवसर, कौशल विकास और सामाजिक स्वीकृति से उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। इंदौर में दो समूहों के बीच हुए विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार की स्थितियां केवल एक शहर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के कई हिस्सों में देखी जा रही हैं। इसलिए व्यापक स्तर पर नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता है।
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