बालाघाट (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने समाज और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ लांजी थाना क्षेत्र की एक 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा ने शनिवार को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही एक नवजात शिशु को जन्म दिया। यह घटना तब और भी दुखद हो गई जब पता चला कि प्रसव और शारीरिक पीड़ा के कारण वह अपनी जीवन की सबसे महत्वपूर्ण 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी। इस मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
लांजी थाना प्रभारी दीप सिंह परमार से मिली जानकारी के अनुसार पीड़िता एक होनहार छात्रा है जो समीप के गांव के स्कूल में कक्षा 10वीं की पढ़ाई कर रही थी। छात्रा के माता-पिता अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बड़े भाई के साथ मजदूरी करने हैदराबाद गए हुए थे। पीछे से छात्रा गांव में अकेली रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी। वह अक्सर अपनी सहेली के घर पढ़ने जाया करती थी जहाँ उसकी जान-पहचान सहेली के भाई से हुई।
आरोपी ने छात्रा की मजबूरी और अकेलेपन का फायदा उठाते हुए उसे शादी का झांसा दिया और डरा-धमका कर उसके साथ पिछले एक साल से कई बार दुष्कर्म किया। आरोपी ने स्कूल के पीछे और घर में छात्रा का शारीरिक शोषण किया जिससे वह गर्भवती हो गई। समाज के डर और आरोपी की धमकी की वजह से मासूम छात्रा ने यह बात किसी को नहीं बताई।
रास्ते में हुआ प्रसव और छूटी परीक्षा
जब धान की रोपाई का समय आया तो छात्रा के माता-पिता हैदराबाद से वापस घर लौटे। शनिवार सुबह छात्रा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। घबराए हुए माता-पिता उसे तुरंत इलाज के लिए लांजी अस्पताल ले जाने लगे लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही रास्ते में छात्रा ने एक बेटे को जन्म दे दिया। पिता ने तुरंत 108 एम्बुलेंस को फोन कर इसकी जानकारी दी जिसके बाद जच्चा और बच्चा को अस्पताल पहुँचाया गया। छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर के आइसीयू में भर्ती किया गया है जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।
प्रसव की इस आकस्मिक स्थिति के कारण छात्रा अपनी 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने से वंचित रह गई। एक अपराधी की हैवानियत ने न केवल एक मासूम का बचपन छीना बल्कि उसके सुनहरे भविष्य और शिक्षा के सपने को भी गहरी चोट पहुँचाई है।
पुलिस की कार्रवाई और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए बालाघाट अस्पताल पुलिस चौकी ने रविवार को महिला थाना पुलिस को सूचित किया। महिला पुलिस ने अस्पताल पहुँचकर पीड़िता के बयान दर्ज किए। बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की दुष्कर्म संबंधी धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की जांच लांजी थाना पुलिस को स्थानांतरित कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं और उसे जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
पलायन और सुरक्षा पर उठते सवाल
यह घटना केवल एक अपराध नहीं है बल्कि उन परिवारों के लिए एक चेतावनी भी है जो काम के सिलसिले में अपने बच्चों को पीछे छोड़कर पलायन करते हैं। गरीबी और मजबूरी के कारण माता-पिता को बाहर जाना पड़ता है लेकिन ऐसे में बच्चों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी कौन करेगा यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है।
ग्रामीण इलाकों में इस तरह के मामलों में जागरूकता की कमी और डर की वजह से पीड़िता अक्सर खामोश रह जाती है जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं। प्रशासन और सामाजिक संगठनों को इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है ताकि किसी और बेटी का भविष्य इस तरह अंधकारमय न हो।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम छात्रा और नवजात के स्वास्थ्य पर नज़र बनाए हुए है। पुलिस का दावा है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। समाज को भी ऐसी घटनाओं के प्रति संवेदनशील होने की ज़रूरत है ताकि अपराधी को कड़ी सजा मिले और पीड़ित को समाज में फिर से सम्मान के साथ जीने का अवसर मिल सके।
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