मध्य प्रदेश के Kuno National Park में एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है। दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इन शावकों के जन्म के साथ भारत में कुल चीता संख्या बढ़कर 38 हो गई है।
यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब भारत में चीता पुनर्वास परियोजना को तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं। लगातार हो रहे सफल प्रजनन से यह संकेत मिलता है कि कुनो का वातावरण अब इस प्रजाति के अनुकूल साबित हो रहा है।

भारत में जन्मे शावकों की संख्या 27
गामिनी दूसरी बार मां बनी है। उसके नए शावकों के साथ भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 27 पहुंच गई है। यह भारत की धरती पर अब तक का नौवां सफल प्रजनन है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मां और तीनों शावक स्वस्थ हैं और विशेषज्ञों की टीम उन पर लगातार नजर रख रही है।
रेडियो कॉलर और आधुनिक ट्रैकिंग प्रणाली के माध्यम से चीतों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
1952 में विलुप्त हुआ था चीता
भारत में वर्ष 1952 में चीते को आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। इसके बाद कई दशकों तक यह प्रजाति देश में नहीं देखी गई। लंबे वैज्ञानिक अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बाद Project Cheetah की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य देश में चीते की पुनर्स्थापना करना है।
इस परियोजना के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर कुनो में बसाया गया।
Project Cheetah की चुनौतियां और उपलब्धियां
पिछले तीन वर्षों में परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें कुछ चीतों और शावकों की मृत्यु भी शामिल रही। हालांकि लगातार सफल जन्म यह दर्शाते हैं कि पुनर्वास की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन्यजीव पुनर्स्थापना परियोजना में शुरुआती वर्षों में उतार चढ़ाव स्वाभाविक होते हैं।
संरक्षण प्रयासों की बड़ी जीत
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया है। कुनो में तैनात फील्ड स्टाफ, पशु चिकित्सक और वन्यजीव विशेषज्ञ चौबीस घंटे चीतों की देखरेख कर रहे हैं चीता घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके पुनर्वास से जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
गामिनी के तीन शावकों का जन्म केवल एक वन्यजीव समाचार नहीं है, बल्कि यह भारत के संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। आने वाले समय में यदि ये शावक सुरक्षित रूप से बड़े होते हैं तो देश में चीता आबादी और स्थिर तथा मजबूत हो सकती है।
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