नई दिल्ली। शैफली वर्मा को महिला क्रिकेट का विरेंद्र सहवाग कहा जाता है। वजह साफ है बल्लेबाजी का जैसा अंदाज वीरू का था, वैसा ही शैफाली का भी है। विश्वकप की पंद्रह सदस्यीय टीम तय हुई थी तो शैफाली वर्मा के शामिल नहीं होने पर सवाल थे, लेकिन जब प्रतिका रावल का खेल आगे किया तो मुंह बंद हो गए। टीम से निकाले जाने के बाद से शैफाली ने खेल बदला। छोटी चमकदार पारियां बड़ी हो गईं। घरेलू क्रिकेट में
खूब रन बनाए। शैफाली ने बीस ओवर क्रिकेट में तो वापसी कर ली, लेकिन प्रतिका ने पचास ओवर के खेल में नहीं लौटने दिया।
प्रतिका रावल का दावा मजबूत था
शैफाली पचास ओवर विश्वकप खेल चुकी हैं, लेकिन दोनों में से एक चुनना है तो इस फार्मेट के लिए प्रतिका से बेहतर नहीं हो सकतीं। स्मृति मंधाना के सात प्रतिका ने आते ही बड़ी साझेदारियां करना शुरू कर दीं। फिर मंधाना के तेज खेल ने भी आसानी कर दी कि प्रतिका को बल्ला घुमाने की जरूरत नहीं पड़ी। लंबी पारियां खेलती हैं। न्यू जीलैंड के खिलाफ बता चुकी हैं।
प्रतिका की चोट ने सही शैफाली को वो मौका दे दिया है, जिसके लिए यह खिलाड़ी सालभर का वनवास झेल रही है। शैफाली के चेहरे से मासूमियत भी जा चुकी है। शैफाली के पास अभी भी शॉट वहीं हैं, लेकिन फिजुल हवा में मारना कम कर दिया है। दूसरे मौके की हदकार थीं… सही मौके पर मिला है।
ऋचा घोष की उंगली में दर्द
खबर तो यह भी है कि ऋचा घोष की उंगली में दर्द है। सेमीफाइनल में उतरना मुश्किल हो सकता है। मंधाना के बाद टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन प्रतिका और ऋचा ने ही बनाए हैं। प्रतिका को टूर्नामेंट से बाहर हो गई हैं और अब ऋचा पर निगाह हैं। यस्तिका भाटिया टूर्नामेंट की शुरुआत में ही चोट की वजह से टीम में जगह नहीं बना पाईं थीं।
