भोपाल। नाम बदल का खेल देश में तो एक दशक से से चल रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश में दो मामलों ने ज्यादा तूल पकड़ा… इंदौर के चंदन नगर में गलियों के नाम बदलने की कोशिश हुई और अलीराजपुर को आलीराजपुर करने पर। अब मध्यप्रदेश में 53 जगह के नाम बदले जा रहे हैं। इसमें गांव, शहर, मोहल्ले, कस्बे सब शामिल हैं। सबसे ज्यादा बदलाव प्रदेश के सबसे बड़े जिले देवास में हो रहे हैं। यहां 19 नाम बदलने की तैयारी है। फतनपुर को विजयपुर, मोहम्मद खेड़ा को मोहनपुर छोटा, मिर्जापुर को मीरापुर, अकबरपुर को अंबिकापुर, घटिया गयासुर को देवधाम, चांदगढ़ को चंदनगढ़, तमखन को कान्हापुर, संदलपुर को चंदनपुर, फतेहगढ़ को विजयगढ़, दावत को देव नगर, मसानपुरा को मदनपुरा, मोहम्मदपुर को गंगा नगर, रंडीपुरा को रानीपुरा, इस्माइलखेड़ी को ईश्वरपुरा, ढेकिया को विजय नगर, नुसराबाद को द्वारकापुरी और कल्लूखेड़ी को केसरी नगर कर रहे हैं।
शाजापुर जिले के भी कुछ नाम
शाजापुर जिले में मोहम्मद मचनई को मोहनपुर, धाबला हुसैनपुर को धाबलाराम, मोहम्मद परनालिया को रामपुर परनालिया, खजूरी अल्दाह को खजूरीराम, हाजीपुर को हीरापुर, निपानिया हिसामुद्दीन को निपानिया देव, रिचड़ी हिसामुद्दीन को रिचड़ी, उ”ाोंद को उ”ाावन, शेखपुर बोगी को अवधपुर, नबीपुर को नयापुर, पीर बड़ाली को पवन बड़ालिया करने की तैयारी है। टीकमगढ़ जिले में डुंडा को माताबेटी बाई, क्षिपरी को मथुराधाम कर रहे हैं। खरगोन में भतेयंत संत को सियाराम नगर कर रहे हैं। रीवा जिले में नास्ति गांव को दिव्य गांव करने का प्रस्ताव है। सागर के देवारी को देवपुरी किया जा रहा है।
ज्यादातर मुस्लिम नाम बदल रहे
बदले जा रहे नामों में नब्बे फीसद नाम मुस्लिम हैं। लगभग हर जिले में नाम बदलने की तैयारी है। गृह मंत्रालय की तरफ से 14 पाइंट वाला फार्म तैयार किया गया है, उसमें फिट बैठने पर ही नाम बदल हो सकेगा। इस बेला में वो गांववाले भी नए नाम की आस लगाए बैठे हैं, जो बरसों से चक्कर काट रहे हैं। रतलाम और सीधी में कुछ गांवों के नाम गाली जैसे ही हैं। दशकों से यहां के बूढ़े सरकारी दफ्तर और कोर्ट के दर पर मत्था टेक चुके हैं, लेकिन हाथ खाली हैं। फजीहत इतनी है कि इन गांवों में रिश्ते होने में परेशानी होती है।
