जम्मू-कश्मीर एक बार फिर आतंकवाद की भयानक तस्वीर का गवाह बना है। 22 अप्रैल 2025 को अनंतनाग जिले के पहलगाम क्षेत्र में हुए एक भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। यह हमला न केवल मानवता के विरुद्ध अपराध है, बल्कि भारत की संप्रभुता और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक क्रूर प्रयास भी है। इस हमले के बाद देश में आक्रोश और चिंता का माहौल है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और देश की सेना को ‘पूरी तरह से आज़ादी’ देने की घोषणा की। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, थलसेना और वायुसेना प्रमुखों के साथ-साथ अन्य खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक में आतंकवाद के खिलाफ ठोस रणनीति पर चर्चा की गई और यह सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि ऐसे हमले भविष्य में न हों।
प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि वे किसी भी प्रकार की राजनीतिक या प्रशासनिक बाधा की चिंता किए बिना आतंकवादियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करें। ‘पूरी तरह से आज़ादी’ का आशय है कि अब सेना और अर्धसैनिक बलों को अपने विवेक से, ज़मीन पर हालात को देखते हुए सर्जिकल स्ट्राइक, टारगेटेड ऑपरेशन या सीमा पार कार्रवाई जैसी किसी भी रणनीति को अपनाने की छूट है।
हमले के बाद पूरे देश से तीव्र प्रतिक्रिया सामने आई। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से सुरक्षा में चूक के सवाल पूछे, वहीं केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए सभी दलों से एकजुटता की अपील की। नागरिक समाज और आम जनता ने हमले की निंदा करते हुए सरकार से त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की।
भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। भारत पहले भी कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद के संरक्षण और समर्थन के लिए जिम्मेदार ठहराता रहा है। अब एक बार फिर यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर उठने की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह घोषणा कि “सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी गई है”, एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय सेना किस तरह से इस छूट का उपयोग करती है और क्या यह रणनीति घाटी में आतंकवाद की कमर तोड़ने में सफल हो पाती है।
जम्मू-कश्मीर का पहलगाम हमला एक कड़वी सच्चाई है कि आतंकवाद अभी भी हमारे दरवाज़े पर खड़ा है। ऐसे समय में राजनीतिक इच्छाशक्ति, सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और जनता की एकजुटता ही इस समस्या का समाधान निकाल सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सेना को कार्रवाई की पूरी छूट देना यह दर्शाता है कि भारत अब किसी भी सख़्त कदम से पीछे नहीं हटेगा। आने वाले दिनों में इस निर्णय के परिणाम साफ़ दिखाई देंगे या तो आतंकवाद झुकेगा, या भारत पहले से भी ज़्यादा मज़बूती से खड़ा होगा।
