Andre Russell की बल्लेबाजी को देखकर हमेशा यह विश्वास जागता था कि मैदान पर कुछ भी मुमकिन है। चाहे रन गेंदों से दुगने क्यों न हों, पिच मुश्किल क्यों न हो और बाउंड्री कितनी ही लंबी क्यों न हो, रसेल क्रीज पर उतरते थे तो मैच का रुख बदल जाता था। इसी करिश्मे की वजह से वह T 20 क्रिकेट के सबसे बड़े नामों में शामिल हो गए। लेकिन अब यह अद्भुत सफर अपने अंतिम पड़ाव पर है। Russell पहले ही अपनी राष्ट्रीय टीम वेस्टइंडीज से विदाई ले चुके थे और अब उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग को भी अलविदा कह दिया है।
Russell के इस फैसले में एक गहरी भावना भी जुड़ी है। जिस दौर में कई खिलाड़ी पैसों के लिए अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी छोड़ देते हैं और फ्रेंचाइजी क्रिकेट को चुन लेते हैं, उसी दौर में रसेल ने वफादारी और ईमानदारी की मिसाल पेश की। इस बार उनकी टीम Kolkata Knight Riders ने उन्हें रिटेन नहीं किया था। वह चाहें तो किसी और टीम से खेल सकते थे और चेन्नई जैसी बड़ी टीम में जाने की संभावना सबसे ज्यादा बताई जा रही थी। लेकिन Russell ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह केवल कोलकाता की ओर से खेलेंगे और यदि ऐसा नहीं होगा तो वह IPL नहीं खेलेंगे। अंत तक उन्होंने उसी बात पर टिके रहकर यह सिद्ध भी कर दिया।
उनकी यह निष्ठा एक पुराने एहसान की देन है। जब रसेल को घुटनों की गंभीर सर्जरी की जरूरत थी तब वेस्टइंडीज बोर्ड ने मदद नहीं की थी और न ही किसी अन्य फ्रेंचाइजी ने आगे कदम बढ़ाया था। उस मुश्किल समय में Kolkata Knight Riders के मालिक शाहरुख खान ने उनका पूरा इलाज अपने खर्च पर करवाया। यह वही भरोसा और इंसानियत थी जिसे रसेल ने कभी नहीं भुलाया। मैदान पर अक्सर शाहरुख और रसेल के बीच दिखने वाली गर्मजोशी और सम्मान की तस्वीरें इसी रिश्ते का प्रमाण रही हैं।
करीब डेढ़ दशक तक अपनी तूफानी बल्लेबाजी से दुनिया को रोमांचित करने वाले आंद्रे रसेल को सलाम। वह T 20 क्रिकेट के महान खिलाड़ियों में शामिल थे और हमेशा रहेंगे। आगे के सफर के लिए द फोर्थ न्यूज़ और सभी क्रिकेट प्रेमियों की ओर से उन्हें शुभकामनाएं।
