फिल्मी गानों में बढ़ती अश्लीलता को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। कन्नड़ फिल्म केडी द डेविल के हिंदी वर्जन के गाने ‘Sarke Chunar’ को लेकर सोशल मीडिया पर भारी विरोध देखने को मिला। विवाद बढ़ने के बाद गाने को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने सेंसर प्रक्रिया और कंटेंट मॉनिटरिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर विरोध के बाद हटाया गया गाना
‘Sarke Chunar’ गाने के रिलीज होते ही इसके लिरिक्स और विजुअल्स को लेकर लोगों ने आपत्ति जतानी शुरू कर दी। कई यूजर्स ने इसे अश्लील और आपत्तिजनक बताते हुए हटाने की मांग की। बढ़ते दबाव के बीच गाने को यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। हालांकि अब तक इस मामले में किसी आधिकारिक सरकारी बैन की स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन पब्लिक बैकलैश के चलते निर्माताओं को यह कदम उठाना पड़ा।
Nora Fatehi ने दी सफाई
इस विवाद के केंद्र में रहीं अभिनेत्री Nora Fatehi ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह गाना उन्होंने करीब तीन साल पहले शूट किया था और उस समय उन्हें जो लिरिक्स बताए गए थे, वे आपत्तिजनक नहीं थे। Nora ने यह भी कहा कि हिंदी वर्जन में किए गए बदलावों से वह खुद भी असहज हैं। उनके मुताबिक गाने का मौजूदा स्वरूप देखकर वह भी हैरान हैं और इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने फैंस से भी अपील की कि वे इस विवाद को समझदारी से देखें।
सेंसर प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल
इस विवाद के बाद केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। आमतौर पर किसी भी फिल्म या गाने को रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड की मंजूरी लेनी होती है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि कंटेंट आपत्तिजनक था, तो उसे पहले अनुमति कैसे मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग अलग भाषाओं में वर्जन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से रिलीज होने वाले कंटेंट के कारण निगरानी की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
पहले भी विवादों में रहे हैं कई गाने
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में यह पहला मामला नहीं है जब किसी गाने को लेकर विवाद हुआ हो। पहले भी कई गाने अश्लीलता के आरोपों में घिर चुके हैं। फिल्म खलनायक का गाना चोली के पीछे क्या है अपने समय में काफी विवादित रहा। इसके अलावा मुन्नी बदनाम हुई और फेविकोल से जैसे गानों को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं। इसी तरह Sheila ki Jawani और Chikni Chameli को लेकर भी समाज के एक वर्ग ने विरोध जताया था। हाल ही में Rapper Badshah के गाने टटेरी पर भी विवाद देखने को मिला।
कंटेंट और जिम्मेदारी के बीच संतुलन जरूरी
मनोरंजन के नाम पर परोसे जा रहे कंटेंट में जिम्मेदारी का अभाव नहीं होना चाहिए। डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के कारण अब गाने और वीडियो हर उम्र के दर्शकों तक आसानी से पहुंचते हैं। एक वर्ग जहां इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखता है, वहीं दूसरा वर्ग इसे सामाजिक मूल्यों के खिलाफ मानता है। ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स और नियामक संस्थाओं के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी हो गया है।
‘Sarke Chunar’ विवाद ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में कंटेंट को लेकर निगरानी और पारदर्शिता की जरूरत है। फिलहाल गाना हटाए जाने के बाद मामला कुछ शांत जरूर हुआ है, लेकिन सेंसर सिस्टम और डिजिटल कंटेंट रेगुलेशन को लेकर बहस अभी जारी है।
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