सूरत। इंदौर में चार साल तक बस चलाने वाली निशा शर्मा ने अब सूरत में स्टीयरिंग संभाल लिया है। महानगर पालिका ने दो हफ्ते पहले महिलाओं के लिए पिंक बस शुरू की है। पहली महिला ड्रायवर निशा बता रही हैं कि इंदौर में पिंक और ब्लू बस चलाई थीं। पिकअप, ट्रैक्टर सहित दूसरी छोटी गाडिय़ां भी चला चुकी हूं। दसवीं तक पढ़ी हूं। तीन साल की थी, तब पिता का निधन हो गया। मां ने ही संभाला। पढ़ाई नहीं कर सकी, तो ड्रायविंग का शौक हो गया। अब वही गुजर-बसर का जरिया है। सूरत में बारह मीटर की बस है, इंदौर में साढ़े तेरह मीटर की चलाई है। तारीफ मिल रही है तो खुश हूं, लेकिन हैरानी भी है कि इतनी बातें क्यों। महिलाएं तो अब विमान, ट्रेन तक चला रही हैं।
निशा को प्रधानमंत्री ने भी सराहा
ट्रांसपोर्टेशन समिति के मुखिया सोमनाथ मराठे बता रहे हैं कि शहर में BRTS रूट पर 450 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। इनमें डेढ़ सौ बसें बारह मीटर की हैं। तीन बस ओएनजीसी से सरथाना रूट पर सिर्फ महिलाओं के लिए शुरू की हैं। अब तक पुरुष ड्रायवर ही चला रहे थे। महिला ड्रायवर की तलाश इंदौर में पूरी हुई। हमने निशा को बुलवाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी तारीफ कर चुके हैं। रोज इस रास्ते से गुजरने वाली बी-टेक छात्रा आशा बताती हैं कि जैसे ही हमने महिला ड्रायवर देखी, तो अच्छा लगा। वो अच्छी ड्रायवर हैं। यात्रियों की फिक्र भी करती हैं। आइटी कंपनी में काम कर रही महक पटेल ने बताया कि मैं जैसे ही बस में चढ़ी, उन्हें देख कर आंखों में चमक आ गई। पास जाकर बैठ गई और सब पूछने लगी। फिर जब उतरी तो उनसे हाथ मिलवाया और कहा कि अब तो रोज ही मिलेंगे।
निशा ने सिखाए ड्राइविंग के गुर
सोशल मीडिया पर फोटो-वीडियो आम होने के बाद भी निशा की तारीफ हो रही है। निशा यह भी बता रही हैं कि इतनी बड़ी बस को चलाने के लिए ड्रायवर को क्या-क्या एहतियात रखना है। दोनों साइड ग्लास में देखना जरूरी है। आंख, कान, नाक सिर्फ खुले ही नहीं रखना है, सचेत भी रहना है। इस सबके अलावा ड्रायवर का अंदाजा भी मायने रखता है। कई बार ऐसे हालात बनते हैं कि अनुमान से ही आगे बढऩा पड़ता है। वो रिस्की भी है, लेकिन तजुर्बे के साथ हो जाता है।
