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Reading: नेताजी के सिपाही का 100वें साल में आगमन, आज भी कायम है देशभक्ति का जज्बा
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Fourth Special

नेताजी के सिपाही का 100वें साल में आगमन, आज भी कायम है देशभक्ति का जज्बा

बौद्ध धर्म में उनकी गहरी रुचि थी

Last updated: मार्च 13, 2025 4:36 अपराह्न
By Mihir Dhekane 1 वर्ष पहले
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3 Min Read
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यूं तो भारत की आज़ादी के लिए अनगिनत योद्धाओं ने अपनी जान की बाज़ी लगाई, लेकिन पिछले कुछ वक्त से जो सबसे ज़्यादा आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं, वो हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी आज़ाद हिंद फ़ौज। इसी आज़ाद हिंद फ़ौज के कुछ गिने चुने सिपाहियों में से एक हैं आर. माधवन पिल्लई, जो आज अपने जीवन के 100वें साल की शुरुआत कर चुके हैं। इस खास मौके पर उन्होंने नेताजी की प्रतिमा और अमर जवान ज्योति पर पुष्पांजलि अर्पित की। ये आयोजन भारतीय सेना द्वारा किया गया जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और आम जनता शामिल थी। आइए इस अनजाने नायक के जीवन पर एक नज़र डालते हैं।

आर. माधवन पिल्लई का जन्म 13 मार्च 1926 को Burma के Swryan Township में हुआ था। उनकी माँ धनलक्ष्मी और पिता रंगास्वामी पिल्लई थे। पहले तो वे Indian Independence League में शामिल थे मगर बाद में नेताजी के दखलंदाज़ी के बाद 1 नवंबर 1943 को सिर्फ 18 साल की उम्र में आज़ाद हिंद फ़ौज में शामिल हो गए। उन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज के recruitment officer और fundraiser के रुप में काम किया। ये माधवन ही थे, जिन्होंने Burma के Hanthawaddy, Sawbwagale, Ywadanshe, Swryan, Yangon और Mayongone जैसे शहरों से काफी मात्रा में धन इकट्ठा किया।

1944 में Burma के Rangoon में आज़ाद हिंद फ़ौज fundraising event आयोजित किया गया था, जो तुलाभार शैली में था। इस कार्यक्रम में नेताजी के वज़न के बराबर पैसे, सोना और कीमती पत्थर आदि दान किए गए। आज़ादी के लिए दुनिया भर में भारतीय समुदाय की ओर से दान किए धन के प्रबंधन के लिए नेताजी ने 1944 में Rangoon में आज़ाद हिंद बैंक की स्थापना की। अंग्रेज़ों के खिलाफ वे बड़े बहादुरी से लड़े। बाद में मई 1945 से दिसंबर 1945 तक 8 महीने वे Rangoon जेल में रहे।

बौद्ध धर्म में उनकी गहरी रुचि थी और वे बौद्ध गुरु U-Kaw-Yi के बेहद ही करीब थे। उन्होंने पाली ग्रंथों को लिखना और पढ़ना भी सिखा। दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के मशहूर Red Fort Trials में दोषी पाए गए।

नेताजी की 125वीं जयंती पर भारत सरकार द्वारा उन्हें उनके अमूल्य योगदान के लिए सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया। साथ ही प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ (9 अगस्त) और लाल किले पर आयोजित सभी कार्यक्रमों पर भारत सरकार उन्हें आमंत्रित करती हैं। इस उम्र में भी पिल्लई नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज की धरोहर को संजोने और उसे संरक्षित करने में सक्रिय हैं। उन्हें और उनके जैसे अनगिनत अनजान नायकों को दिल से नमन।

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TAGGED: Azad Hind Fauj, freedom fighters, Indian history, R. Madhavan Pillai, Subhas Chandra Bose, thefourth, thefourthindia
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