Shravan के अंतिम सोमवार पर मध्यप्रदेश के उज्जैन और इंदौर में आस्था का भव्य नजारा देखने को मिला। उज्जैन में बाबा महाकाल की चौथी और अंतिम सवारी नगर भ्रमण पर निकली, तो इंदौर में भी भगवान शिव की भक्ति में कई धार्मिक आयोजन हुए। मंदिरों से लेकर सड़कों तक श्रद्धालुओं की भीड़ और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई दिए।
उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य सवारी
Shravan के चतुर्थ और अंतिम सोमवार पर उज्जैन पूरी तरह शिवमय नजर आया। राजाधिराज बाबा महाकाल चांदी की पालकी में सवार होकर लाव-लश्कर के साथ नगर भ्रमण पर निकले। बाबा के दर्शन के लिए करीब 7.50 लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। सवारी में बाबा महाकाल ने चार अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए। पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, बैलगाड़ी में गरुड़ पर श्री शिवतांडव और बैलगाड़ी में नंदी पर श्री उमा-महेश स्वरूप विराजमान रहे।
रामघाट पर हुआ क्षिप्रा जल से अभिषेक
Shravan की इस सवारी ने महाकालेश्वर मंदिर से नगर भ्रमण शुरू किया। सवारी गुदरी चौराहा होते हुए रामघाट पहुंची। यहां मां क्षिप्रा के पवित्र जल से बाबा महाकाल का पूजन और अभिषेक किया गया। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक और गोपाल मंदिर होते हुए आगे बढ़ी। गोपाल मंदिर में सिंधिया ट्रस्ट की ओर से भगवान का पूजन और स्वागत किया गया। इसके बाद सवारी पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए वापस महाकाल मंदिर पहुंची।
चार स्वरूपों ने बढ़ाई सवारी की भव्यता
Shravan की अंतिम सवारी में चार दिव्य स्वरूपों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहे। सवारी मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में भक्त खड़े रहे। पालकी के पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की और भगवान महाकाल के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल और महाकाल मंदिर बैंड ने बाबा को सलामी भी दी। ढोल-नगाड़ों, भजन मंडलियों और डमरू की गूंज के बीच सवारी आगे बढ़ती रही।
पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश
Shravan की इस सवारी को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया। इस बार पर्यावरण संरक्षण को विशेष विषय बनाया गया। संदेश रथ और झांकी के माध्यम से श्रद्धालुओं को वृक्षारोपण, स्वच्छता और मां क्षिप्रा की निर्मलता बनाए रखने का संदेश दिया गया।
इंदौर में भी शिवभक्ति का दिखा उत्साह
Shravan के अंतिम सोमवार पर इंदौर में भी भगवान शिव की भक्ति में कई आयोजन हुए। शहर में भूतेश्वर महादेव मंदिर विशेष रूप से धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा। यहां मातृशक्ति कांवड़ यात्रा से जुड़ी श्रद्धालुओं की गतिविधियां सामने आईं। उपलब्ध रिपोर्टों और आयोजन से जुड़े स्रोतों में विद्याधाम मंदिर से भूतेश्वर महादेव मंदिर तक मातृशक्ति कांवड़ यात्रा का उल्लेख मिलता है। महिलाओं ने कांवड़ उठाकर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए यात्रा में भाग लिया। इस दौरान भक्ति गीतों और हर-हर महादेव के जयघोष से माहौल शिवमय नजर आया।
भूतेश्वर महादेव की नगर सवारी भी निकली
Shravan के अंतिम सोमवार पर इंदौर के भूतेश्वर महादेव की भव्य नगर सवारी भी प्रमुख धार्मिक आयोजनों में रही। आयोजन से जुड़े स्रोतों के अनुसार भूतेश्वर महादेव की सवारी 24 अगस्त को निकाली गई। भक्तों के लिए यह सवारी भगवान शिव के नगर भ्रमण और उनके दर्शन का विशेष अवसर रही। सवारी के दौरान श्रद्धालुओं की मौजूदगी और धार्मिक उत्साह ने इंदौर के माहौल को भक्तिमय बना दिया।
जीवन मुक्तेश्वर महादेव की सवारी भी रही खास
इंदौर में Shravan के दौरान जीवन मुक्तेश्वर महादेव की सवारी भी धार्मिक आयोजनों का हिस्सा रही। इसके साथ शहर के अलग-अलग शिवालयों में जलाभिषेक, पूजन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस तरह Shravan के अंतिम सोमवार पर इंदौर में केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों और शिव मंदिरों से जुड़े कई धार्मिक कार्यक्रमों ने भक्तों को जोड़ा।
उज्जैन से इंदौर तक गूंजा हर-हर महादेव
Shravan के अंतिम सोमवार पर उज्जैन और इंदौर दोनों शहरों में शिवभक्ति अपने चरम पर दिखाई दी। उज्जैन में करीब 7.50 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी में बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकली, वहीं इंदौर में भूतेश्वर महादेव की नगर सवारी और मातृशक्ति कांवड़ यात्रा जैसे आयोजनों ने श्रद्धालुओं में उत्साह भर दिया। Shravan का यह अंतिम सोमवार धार्मिक आस्था, परंपरा और सामूहिक भक्ति का बड़ा अवसर बन गया। उज्जैन की गलियों से लेकर इंदौर के शिवालयों तक वातावरण एक ही जयकारे से गूंजता रहा—हर हर महादेव।
