Assam में जुलाई 2026 में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। इसी बाढ़ के बीच शिवसागर जिले के चारिंग गांव से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने मुश्किल हालात में परिवार की सूझबूझ और हिम्मत की मिसाल पेश की। 97 वर्षीय लोकाडा दुआराह बाढ़ के पानी में अपने घर में फंस गई थीं। वह चलने में असमर्थ थीं और उस समय आसपास तत्काल मदद के लिए कोई नाव या बचाव दल मौजूद नहीं था। ऐसे में उनकी बेटी बोरनाली बरुआ और उनके पति ने केले के तनों से एक अस्थायी नाव तैयार की। इसी पर बुजुर्ग महिला को लिटाकर परिवार तेज बहाव वाले पानी के बीच सुरक्षित स्थान की ओर निकला।
परिवार करीब एक घंटे बाद राष्ट्रीय राजमार्ग के पास बने राहत शिविर तक पहुंच सका। बोरनाली बरुआ के मुताबिक, 19 जुलाई की आधी रात के बाद उनके इलाके में पानी तेजी से बढ़ने लगा था। उस समय उनकी 97 वर्षीय मां घर में थीं और बिस्तर पर रहती थीं। वह खुद चलकर बाहर निकलने की स्थिति में नहीं थीं। बाढ़ का पानी लगातार बढ़ता जा रहा था। कुछ ही समय में घर के आसपास तीन से चार फीट पानी जमा हो गया और बहाव भी काफी तेज था। बाद में उनके घर के अंदर पानी करीब पांच फीट तक पहुंच गया।
बरुआ ने बताया कि उस समय हर व्यक्ति अपने परिवार को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहा था। उनके आसपास तत्काल मदद के लिए न तो कोई नाव थी और न ही कोई बचाव दल पहुंचा था। ऐसे हालात में परिवार ने केले के तनों का सहारा लिया और उससे एक अस्थायी नाव तैयार की।
केले के तनों की नाव पर बुजुर्ग को निकाला बाहर
97 वर्षीय लोकाडा दुआराह को परिवार ने सावधानी से केले के तनों से बनी अस्थायी नाव पर लिटाया। इसके बाद परिवार के सदस्य तेज बहाव वाले पानी के बीच धीरे-धीरे आगे बढ़े। बोरनाली बरुआ और उनके पति को पानी में खुद को संभालने के लिए एक-दूसरे का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने रास्ते में छड़ियों की मदद से खुद को स्थिर रखा। करीब एक घंटे की मुश्किल यात्रा के बाद परिवार राष्ट्रीय राजमार्ग के पास बने राहत शिविर तक पहुंच पाया। यह सफर इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि पानी की गहराई कई जगह तीन से चार फीट तक थी और बहाव तेज था। बुजुर्ग महिला को सुरक्षित निकालना परिवार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।

चारिंग गांव शिवसागर जिले में स्थित है। बोरनाली बरुआ जन्म से इसी इलाके में रहती हैं। उनके परिवार की कई पीढ़ियां भी इसी क्षेत्र में रह चुकी हैं। उनके मुताबिक, अपने जीवनकाल में उन्होंने इस इलाके में इतनी गंभीर बाढ़ पहले कभी नहीं देखी थी। उन्होंने 1950 में आई एक बड़ी बाढ़ के बारे में जरूर सुना था, लेकिन उसके बाद उनके जीवन में ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली थी।
इस बार बाढ़ का पानी उन इलाकों तक पहुंच गया, जिन्हें स्थानीय लोग आमतौर पर अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते थे। बरुआ का घर कई नदियों से घिरे इलाके में है। उनके घर के आसपास सीधे कोई नदी नहीं बहती, लेकिन ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर यहां तक पहुंच गया।
17 जुलाई से मिलने लगी थी बाढ़ की चेतावनी
बरुआ के अनुसार, बाढ़ की स्थिति बिगड़ने का सिलसिला 17 जुलाई से शुरू हुआ। उस समय झांजी नदी का जलस्तर बढ़ने लगा था। इसके बाद 19 जुलाई के आसपास ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में पानी तेजी से बढ़ा। दिखो और मिटोंग नदियों का पानी आसपास के इलाकों में फैलने लगा। कई जगह तटबंध टूटने से पानी तेज धार के साथ गांवों और कस्बों की ओर बढ़ा। लगातार बढ़ते पानी के कारण बरुआ परिवार को अपना घर छोड़ना पड़ा। परिवार ने अगले करीब 10 दिन राहत शिविर में बिताए। बोरनाली बरुआ के लिए यह सिर्फ घर बचाने की लड़ाई नहीं थी। बाढ़ ने उनकी वर्षों की मेहनत से खड़े किए गए पशुपालन के कारोबार को भी भारी नुकसान पहुंचाया।
Assam बरुआ पहले पूर्णकालिक पत्रकार थीं। वर्ष 2016 में उन्होंने पत्रकारिता छोड़कर पशुपालन को अपना पेशा बनाया था। उनके फार्म में बड़ी संख्या में बकरियां, बत्तखें और मुर्गियां थीं। इसके अलावा फार्म में मछलियां भी पाली जाती थीं। उनके फार्म में करीब 300 बकरियां, 500 बत्तखें और 1,000 मुर्गियां थीं। बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में पशुधन बह गया या नष्ट हो गया। बरुआ के मुताबिक, उनकी अधिकांश बकरियां, करीब 300 बत्तखें और 300 मुर्गियां बाढ़ में नष्ट हो गईं। बड़ी मात्रा में मछलियां भी बच नहीं सकीं। पशुओं के लिए चारा तैयार करने वाली मशीन भी बाढ़ की चपेट में आ गई।
फर्नीचर से लेकर लैपटॉप और किताबें तक बर्बाद
Assam बाढ़ का पानी उनके घर और फार्म तक पहुंचने के बाद परिवार का काफी सामान भी नष्ट हो गया। घर का फर्नीचर, लैपटॉप, वाहन और परिवार की वर्षों से जमा की गई किताबों का संग्रह भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया। बरुआ के मुताबिक, उनके पशुधन का बीमा भी नहीं था। उनका कहना है कि इलाके में पशुधन, खासकर बकरियों के लिए पर्याप्त बीमा व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई उनके परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। पशुपालन के क्षेत्र में उनके काम को पहले पहचान भी मिल चुकी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2019 में उन्हें Assam के सर्वश्रेष्ठ पशुपालक के सम्मान से नवाजा गया था।
जुलाई 2026 में Assam में आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर लोगों को प्रभावित किया। शुरुआती दिनों में प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई और कई जिलों में राहत एवं बचाव अभियान चलाना पड़ा। सरकारी आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग तारीखों पर प्रभावित लोगों और मृतकों की संख्या में बदलाव हुआ। 25 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 7.05 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे और मृतकों की संख्या 61 तक पहुंच गई थी। इसके बाद 28 जुलाई तक मृतकों की संख्या 75 बताई गई। बाढ़ का पानी कम होने के साथ सक्रिय रूप से प्रभावित लोगों की संख्या भी बदलती रही। इसलिए बाढ़ से जुड़े आंकड़ों को रिपोर्ट की तारीख के साथ देखना जरूरी है।
