मध्य प्रदेश का Khajuraho सिर्फ अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और प्राचीन मंदिरों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहां मौजूद मतंगेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच खास आस्था का केंद्र है। करीब एक हजार साल पुराने इस मंदिर में स्थापित विशाल शिवलिंग को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसका आकार हर साल थोड़ा बढ़ता है। यही रहस्य देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। हालांकि, शिवलिंग के हर साल बढ़ने की बात को स्थानीय मान्यता और धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है। मध्य प्रदेश पर्यटन भी इसे स्थानीय कथाओं और मान्यताओं से जुड़ा रहस्य बताता है, न कि वैज्ञानिक रूप से सिद्ध घटना।
Khajuraho का मतंगेश्वर मंदिर क्यों खास है?
मतंगेश्वर महादेव मंदिर Khajuraho के पश्चिमी मंदिर समूह के पास स्थित भगवान शिव को समर्पित प्राचीन मंदिर है। यह उन चुनिंदा मंदिरों में शामिल है जहां आज भी नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार यह 10वीं शताब्दी के शुरुआती दौर का मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग अपनी विशालता और चमकदार सतह के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र है। मध्य प्रदेश पर्यटन के एक आधिकारिक प्रकाशन में इसकी ऊंचाई करीब 2.5 मीटर और व्यास करीब एक मीटर बताया गया है।
हर साल बढ़ता है शिवलिंग, क्या है मान्यता?
मतंगेश्वर मंदिर की सबसे चर्चित मान्यता इसके विशाल शिवलिंग से जुड़ी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार शिवलिंग का आकार हर साल थोड़ा बढ़ता है। मध्य प्रदेश पर्यटन के मुताबिक मंदिर के पुजारी कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर इसकी माप लेते हैं और इसी परंपरा के कारण इसे बढ़ता हुआ शिवलिंग कहा जाता है। धार्मिक मान्यता में इस वृद्धि को भगवान शिव की दिव्य शक्ति से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा आकाश की ओर और इसका आधार पाताल लोक की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, इस दावे के पीछे कोई वैज्ञानिक अध्ययन या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे आस्था और स्थानीय लोककथा के रूप में ही देखना उचित है।

मरकत मणि से जुड़ी है शिवलिंग की पौराणिक कथा
मतंगेश्वर मंदिर से जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा मरकत मणि से संबंधित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने पांडवों में ज्येष्ठ युधिष्ठिर को एक दिव्य मणि प्रदान की थी। बाद में यह मणि मतंग ऋषि और फिर राजा हर्षवर्धन से जुड़ी कथा का हिस्सा बनती है। कथा के अनुसार मणि की शक्ति की रक्षा के लिए उसे जमीन के भीतर सुरक्षित रखा गया और इसी स्थान पर शिवलिंग प्रकट हुआ। मान्यता में शिवलिंग के लगातार बढ़ने को भी इसी दिव्य मणि की शक्ति से जोड़ा जाता है। यह कहानी पौराणिक मान्यता है। इसके ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन भी इस कथा को स्थानीय किंवदंती के रूप में प्रस्तुत करता है।
Khajuraho के मंदिरों का निर्माण चंदेल राजवंश के शासनकाल में हुआ था। यूनेस्को के अनुसार Khajuraho के मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली की स्थापत्य कला के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं और इनका निर्माण मुख्य रूप से 10वीं और 11वीं शताब्दी में हुआ। मतंगेश्वर मंदिर को Khajuraho के सबसे पुराने मंदिरों में गिना जाता है। यूनेस्को के एक दस्तावेज में इसे 10वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर बताया गया है।
मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार इसका निर्माण लगभग 900 से 925 ईस्वी के बीच माना जाता है। यह मंदिर आज भी सक्रिय पूजा स्थल है, जो इसे Khajuraho के दूसरे ऐतिहासिक मंदिरों से अलग पहचान देता है।
मंदिर की सादगी में छिपी है खास वास्तुकला
Khajuraho के कई मंदिर अपनी बेहद बारीक मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन मतंगेश्वर मंदिर की पहचान कुछ अलग है। इसका स्वरूप अपेक्षाकृत सादा है और इसके गर्भगृह में स्थापित विशाल शिवलिंग सबसे प्रमुख आकर्षण है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार मंदिर के अंदर मौजूद शिवलिंग की सतह बेहद अच्छी तरह पॉलिश की गई है। मंदिर की छत में एक-दूसरे पर चढ़ते हुए गोलाकार घेरे दिखाई देते हैं, जो इसकी स्थापत्य विशेषताओं में शामिल हैं। यही वजह है कि मतंगेश्वर मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास और स्थापत्य में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Khajuraho के विश्व धरोहर परिसर का हिस्सा
Khajuraho Group of Monuments को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इस परिसर में हिंदू और जैन धर्म से जुड़े मंदिरों के तीन प्रमुख समूह हैं। यूनेस्को के अनुसार यहां बचे मंदिर चंदेल काल की स्थापत्य और मूर्तिकला परंपरा की उत्कृष्ट मिसाल हैं। मतंगेश्वर मंदिर Khajuraho के पश्चिमी समूह के मंदिरों के साथ स्थित है। मध्य प्रदेश पर्यटन भी पश्चिमी समूह में मतंगेश्वर, कंदारिया महादेव, लक्ष्मण, वराह और अन्य प्रमुख मंदिरों को शामिल करता है।
महाशिवरात्रि पर उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु
मतंगेश्वर मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार इस अवसर पर मंदिर में भगवान शिव के विवाह से जुड़े कई दिनों तक चलने वाले समारोह आयोजित किए जाते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु Khajuraho पहुंचकर मतंगेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं। मंदिर की प्राचीनता, विशाल शिवलिंग और इससे जुड़ी मान्यताएं इसे धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाती हैं।
Khajuraho को आमतौर पर उसकी विश्व प्रसिद्ध मूर्तिकला के लिए जाना जाता है, लेकिन मतंगेश्वर मंदिर इस ऐतिहासिक नगरी का एक अलग आध्यात्मिक पक्ष सामने लाता है। करीब एक हजार साल से अधिक पुराना यह मंदिर आज भी पूजा और श्रद्धा का जीवंत केंद्र बना हुआ है।
