Ganesh Chaturthi के अवसर पर मध्य प्रदेश के इंदौर में भगवान गणेश की भक्ति का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। शहर के प्रसिद्ध और प्राचीन गणेश मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। इन मंदिरों की खासियत सिर्फ इनका इतिहास नहीं, बल्कि यहां विराजित भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूप, मान्यताएं और गणेश उत्सव के दौरान होने वाले विशेष शृंगार और भोग भी हैं। इंदौर में खजराना गणेश से लेकर बड़ा गणपति, खड़े गणेश, चिंतामन गणेश और छोटा गणपति जैसे कई मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। किसी मंदिर में बप्पा की विशाल प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है तो कहीं उनकी प्रतिमा का स्वरूप ही भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
Ganesh Chaturthi पर खजराना गणेश का भव्य शृंगार
इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में Ganesh Chaturthi का उत्सव हर साल बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इस बार भगवान गणेश का करीब 7 करोड़ रुपये के आभूषणों से भव्य शृंगार किया गया है। बप्पा को सोने का मुकुट, स्वर्ण छत्र और हीरे जड़ी आंखों सहित कीमती आभूषण पहनाए गए हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में सवा लाख मोदकों का महाभोग भी लगाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए मंदिर में विशेष दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

खजराना गणेश मंदिर का इतिहास भी बेहद खास है। मध्य प्रदेश शासन के पर्यटन पोर्टल के अनुसार, मान्यता है कि मुगल काल में प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक कुएं में छिपाया गया था। बाद में 1735 में प्रतिमा को बाहर निकालकर मंदिर की स्थापना की गई।
बड़ा गणपति मंदिर में 25 फीट ऊंचे बप्पा

इंदौर का बड़ा गणपति मंदिर अपनी विशाल गणेश प्रतिमा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां भगवान गणेश की करीब 25 फीट ऊंची प्रतिमा विराजित है। Ganesh Chaturthi उत्सव के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहती है और बप्पा का विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है। इस प्रतिमा का निर्माण 1895 में शुरू होकर 1901 में पूरा हुआ था। उपलब्ध विवरण के अनुसार प्रतिमा के निर्माण में पंचधातु, पवित्र नदियों का जल और धार्मिक स्थलों की मिट्टी का उपयोग किया गया था। मंदिर में भगवान गणेश को चोला चढ़ाने की परंपरा भी विशेष है और इसमें कई दिन लगते हैं।
जुनी इंदौर के खड़े गणेश की अनोखी प्रतिमा

जुनी इंदौर स्थित खड़े गणेश मंदिर भी शहर के प्रमुख प्राचीन गणेश मंदिरों में शामिल है। यहां भगवान गणेश की करीब पांच फीट ऊंची प्रतिमा नृत्य मुद्रा में विराजित बताई जाती है। इस प्रतिमा को करीब 700 वर्ष पुराना बताया जाता है। Ganesh Chaturthi उत्सव के दौरान मंदिर में भगवान गणेश का विशेष शृंगार किया जाता है। अलग-अलग दिनों में बप्पा को अलग स्वरूपों में सजाया जाता है और भक्त विशेष पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। यही अनोखा स्वरूप इस मंदिर को शहर के दूसरे गणेश मंदिरों से अलग पहचान देता है।
चिंतामन गणेश और पोटली वाले गणेश की खास पहचान
जुनी इंदौर में सरस्वती नदी के किनारे स्थित चिंतामन गणेश मंदिर को भी प्राचीन गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां विराजित भगवान गणेश की प्रतिमा दाहिनी सूंड वाली है, जिसे भक्त विशेष और सिद्ध स्वरूप मानते हैं। मंदिर को ‘पोटली वाले गणेश’ के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 में प्रतिमा का चोला बदलने के बाद भगवान गणेश के हाथ में पोटली का स्वरूप दिखाई दिया। इसके बाद यह मंदिर ‘पोटली वाले गणेश’ के नाम से भी प्रसिद्ध हो गया। मंदिर में वर्ष 1985 में रिद्धि-सिद्धि की प्राण प्रतिष्ठा भी कराई गई थी।

छोटा गणपति मंदिर की भी अलग पहचान
इंदौर में छोटा गणपति मंदिर भी भगवान गणेश के प्रमुख मंदिरों में शामिल है। Ganesh Chaturthi के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना और शृंगार किया जाता है। गणेश उत्सव के दिनों में मंदिरों में होने वाले विशेष आयोजन शहर के धार्मिक माहौल को और खास बना देते हैं। इंदौर की खासियत यह है कि यहां भगवान गणेश के अलग-अलग मंदिरों में उनकी प्रतिमाओं के स्वरूप और उनसे जुड़ी मान्यताएं अलग हैं। यही वजह है कि Ganesh Chaturthi के दौरान श्रद्धालु इन मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

इंदौर में गणेश उत्सव का खास आकर्षण
गणेश चतुर्थी सिर्फ पूजा और दर्शन का पर्व नहीं है, बल्कि इंदौर के प्राचीन गणेश मंदिरों की परंपराओं और उनकी अनोखी पहचान को देखने का भी अवसर है। खजराना गणेश का करोड़ों के आभूषणों वाला शृंगार, बड़ा गणपति की विशाल प्रतिमा, खड़े गणेश की नृत्य मुद्रा और चिंतामन गणेश की पोटली वाली पहचान, ये सभी स्वरूप शहर की धार्मिक विरासत को खास बनाते हैं।
