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Reading: AI के Misuse से personality rights का उल्लंघन एक चिंताजनक सवाल, सद्गुरु के मामले में कोर्ट ने दिया अहम ऑर्डर!
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AI के Misuse से personality rights का उल्लंघन एक चिंताजनक सवाल, सद्गुरु के मामले में कोर्ट ने दिया अहम ऑर्डर!

AI के माध्यम से आज ‘Deepfake’, ‘Synthetic Voice Cloning’, ‘AI Avatars’, और ‘Chatbots’ जैसी चीजों से किसी भी व्यक्ति की छवि, आवाज़ और शैली की हूबहू नक़ल की जा सकती है।

Last updated: जून 2, 2025 6:12 अपराह्न
By Rajneesh 1 वर्ष पहले
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5 Min Read
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Artificial intelligence आज केवल एक तकनीकी शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और कानूनी चुनौती बन चुका है। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए एक Dynamic Injunction order pass किया गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि AI अब न केवल सुविधाजनक tool है, बल्कि इसकी वजह से Personality Rights , privacy और identity को भी hijacked किया जा सकता है।

Personality Rights वह अधिकार हैं जो किसी व्यक्ति के नाम, छवि, voice, signature, postures और किसी व्यक्ती की पूरी original personality पर उसके नियंत्रण को सुनिश्चित करते हैं। भारत में यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा माने जाते हैं।

यह अधिकार especially public personality, जैसे अभिनेता, खिलाड़ी, आध्यात्मिक गुरु, राजनेता आदि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उनकी पहचान को कमर्शियल बेनिफिट के लिए अकसर उपयोग किया जाता है।

AI के माध्यम से आज ‘Deepfake’, ‘Synthetic Voice Cloning’, ‘AI Avatars’, और ‘Chatbots’ जैसी चीजों से किसी भी व्यक्ति की छवि, आवाज़ और शैली की हूबहू नक़ल की जा सकती है।

सद्गुरु के मामले में यही हुआ। उनकी आवाज़ और पिक्चर्स को मिलाकर गलत सूचनाएं और भ्रामक Content तैयार किया गया, जिससे न केवल उनकी पहचान को नुकसान पहुंचा, बल्कि जनता में भ्रम भी फैला।

AI के ये ‘डिजिटल क्लोन’ इस कदर सटीक होते हैं कि आम आदमी के लिए वास्तविकता और created version में अंतर कर पाना मुश्किल होता है। इससे दो प्रमुख खतरे सामने आते हैं। पहला किसी प्रसिद्ध व्यक्तियों की छवि को क्षति पहुँचाना जैसे फर्जी वीडियो या आवाज़ों से उनकी छवि को बदनाम किया जा सकता है या गलत विचार उनके नाम से प्रचारित किए जा सकते हैं। दूसरा, पब्लिक को भ्रमित करना और अफवाहें फैलाना, विशेषकर चुनाव, धार्मिक मुद्दों या सामाजिक आंदोलनों के समय यह गंभीर परिणाम ला सकता है।

भविष्य में AI की क्षमताएं इतनी उन्नत हो जाएंगी कि किसी भी व्यक्ति का Entire Digital Replica बनाया जा सकेगा। जिसका इस्तेमाल फ़िल्मों, विज्ञापनों, भाषणों, यहाँ तक कि चुनाव अभियानों में भी हो सकता है। यदि इसकी कोई कानूनी सीमा न हो, तो कल्पना कीजिए कि, कोई मृत व्यक्ति ‘नया भाषण’ दे रहा हो,कोई धार्मिक गुरु कोई विवादास्पद बात कह रहा हो जो उसने कभी नहीं कही या कोई राजनेता अपने विरोधी के नाम से बयान दे रहा हो। यह सब समाज में भ्रम, अराजकता और झूठ के विस्तार को जन्म देगा।

वर्तमान में भारत में व्यक्तित्व अधिकारों की स्पष्ट परिभाषा या क़ानून मौजूद नहीं है। यह अधिकार अलग अलग न्यायिक निर्णयों के आधार पर विकसित हुए हैं। सद्गुरु मामले में हाईकोर्ट ने एक dynamic injection order दिया है, जो इस प्रकार के कंटेंट को भविष्य में भी रोकने की शक्ति रखता है। यह एक स्वागतयोग्य कदम है।

इसे रोकने के लिए कुछ प्रयास किए जा सकते हैं। जैसे – संसद द्वारा एक विशेष अधिनियम लाया जाना चाहिए जो व्यक्तित्व अधिकारों को संविधानिक संरक्षण प्रदान करे। Deepfake और synthetic media के लिए penal provision हों, और इनका publication करने वाले प्लेटफ़ॉर्म को भी जवाबदेह ठहराया जाए। सोशल मीडिया और वीडियो होस्टिंग साइट्स को AI आधारित फर्जी सामग्री को पहचानने और रोकने के लिए तकनीकी उपाय विकसित करने चाहिए। सार्वजनिक व्यक्तियों को अपनी असली सामग्री की सत्यता के लिए डिजिटल हस्ताक्षर प्रणाली अपनानी चाहिए, जिससे फर्जी क्लोन का भंडाफोड़ किया जा सके। और, आम जनता को AI के माध्यम से फैलाए जा रहे भ्रम के प्रति सतर्क करना होगा।

AI तकनीक ने दुनिया को तेज़ और सुविधाजनक बनाया है, लेकिन यह उसी सिक्के का दूसरा पहलू भी सामने ला रही है, जहाँ मनुष्य की पहचान, छवि और अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है। व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा न केवल प्रसिद्ध व्यक्तियों के लिए, बल्कि हर नागरिक के लिए आवश्यक है।

दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय एक नज़ीर है, लेकिन इसके बाद ठोस कानूनी व्यवस्था बनाना हमारी तत्काल ज़िम्मेदारी है, ताकि भविष्य में कोई भी तकनीक मनुष्य की गरिमा और पहचान को विकृत न कर सके।

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TAGGED: AI, Misuse, personality rights, Sadhguru, Sadhguru Jaggi Vasudev, thefourthindia
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