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कार्बाइड गन और इंस्टा के ‘फन ट्रेंड’ ने छीनी बच्चों के आंखों की रोशनी, जुगाड़ वाली सस्ती गन से बच्चे घायल

दिवाली के समय सस्ती और जुगाड़ वाली कैल्शियम कार्बाइड गन का उपयोग बहुत तेजी से बड़ा है

Last updated: अक्टूबर 25, 2025 3:30 अपराह्न
By Rajneesh 12 महीना पहले
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5 Min Read
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पिछले कुछ सालों में दिवाली के समय सस्ती और जुगाड़ वाली कैल्शियम कार्बाइड गन का उपयोग बहुत तेजी से बड़ा है, लेकिन यह सस्ती देसी बंदूक बेहद खतरनाक साबित हो रही है, 15 साल से कम उम्र के बच्चों की आंखों को डैमेज कर रही है। यह गन न तो खिलौना है और न ही कोई पटाखा। यह एक प्रकार का रासायनिक बम है। पानी और कैल्शियम कार्बाइड के मिलन से जोरदार धमाका होता है। हैरानी की बात है कि यह बम खुले बाजार में 200 रुपये से भी कम में मिल रहा है। पिछले तीन-चार दिनों में पूरे मध्यप्रदेश में इस तरह कई मामले सामने आ चुके हैं।

कार्बाइड गन इंटरनेट मीडिया से वायरल होकर लाखों-करोड़ों बच्चों तक पहुंच गई है। बच्चे इसे दिवाली का नया ट्रेंड समझ बैठे। Y ट्रेंड इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ जिस वजह से बड़ी संख्या में बच्चे घायल होकर अस्पताल पहुंचे। कई की आंखों की रोशनी चली गई तो कुछ के चेहरे झुलसे। यह सब हुआ चंद सेकंड का सोशल मीडिया वीडियो शूट करने के चक्कर में। कार्बाइड गन को खतरनाक ट्रेंड माना जा रहा है पर इसके वीडियो अभी तक हटाए नहीं गए हैं।

19 से 21 अक्टूबर तक 122 मामले अलग-अलग अस्पतालों से सामने आए थे। इसके बाद गिनती थोड़ी कम हुई। इनमें से सबसे ज्यादा 36 केस भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में दर्ज हुए। विदिशा मेडिकल कॉलेज में 12, सागर मेडिकल कॉलेज में 3 और इंदौर में 3 केस आए थे।

नेत्र रोग विभाग के एक्सपर्ट ने चेताया

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर प्रवीण खरे बताते हैं कि कार्बाइड की गन का आजकल लोग पक्षियों को भगाने, खेतों से जानवरों को भगाने, तेज आवाज करने या फिर मजे के लिए भी इसका उपयोग कर रहे हैं, लेकिन यह बहुत ही खतरनाक है. क्योंकि इसमें जो विस्फोट होता है वह अचानक हो जाता है. कभी-कभी इसमें जो नाल होती है, उसमें बार-बार जंग लगती है इसलिए साफ करना पड़ता है और सफाई देखने के लिए जब उस छेद में से देखते हैं तो कभी-कभी अचानक विस्फोट हो जाता है। उसमें बहुत तरह से इंजरी हो रही हैं जिससे कॉर्निया तक जल जाता है। इसके अलावा जो बारूद के कण निकलते हैं वह पूरे आंख में चिपक जाते हैं उनको एक-एक करके निकलना पड़ता है। कभी-कभी तो विस्फोट इतना तेज होता है कि आंख भी पूरी तरह से हट जाती है, इस तरह के केस आते रहते हैं, दिवाली ही नहीं और भी समय पर इस तरह के केस लगातार आ रहे है। किसी की एक आंख में किसी के दोनों आंख में इंजरी हो जाती है। खासकर बच्चों में जिनको इस तरह के शौक होते हैं उनमें यह देखने को मिल रहा, यह बहुत ही खतरनाक है इसलिए इसे बचना है तो यह अवैध है इसलिए उपयोग ही नहीं करना चाहिए बच्चों को दूर रखना चाहिए।

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IGIMS स्थित चक्षु केंद्र के चीफ सह उप निदेशक डा. विभूति प्रसन्न सिन्हा के अनुसार दिवाली के पहले व बाद में अबतक करीब 50 बच्चे कार्बाइड गन से घायल होकर इलाज कराने आ चुके हैं। सरकारी व निजी अस्पतालों के आंकड़े समेकित न होने से अभी यह नहीं पता कि प्रदेश में कुल कितने बच्चे इसकी चपेट में आए होंगे लेकिन अनुमान है कि 150 से 200 तक लोग गंभीर या आंशिक रूप से जुगाड़ गन से दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं।

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डॉक्टर विभूति व नेत्र रोग विशेषज्ञ निम्मी रानी के अनुसार कार्बाइड गन, दो प्लास्टिक पाइप एक थोड़ा मोटा व दूसरा थोड़ा पतला को ज्वाइंटर से जोड़ कर बनाया जाता है। मोटे पाइप को एक ओर से बंद कर उसमें कैल्शियम कार्बाइड व पानी डाल कर पाइप के ऊपर से गैस लाइटर लगाया जाता है। कैल्शियम कार्बाइड पानी के संपर्क में आने पर अत्यधिक ज्वलनशील एसिटिलिन गैस पैदा करती है जो जरा सी चिंगारी या अधिक दबाव से रोशनी के साथ विस्फोट करती है। बच्चे कैल्शियम कार्बाइड को पानी के संपर्क में लाने के लिए पहले पाइप को हिलाते हैं और फिर ऊपर से गैस लाइटर दबाते हैं तो विस्फोट होता है। कई बार विस्फोट नहीं होने पाइप के एक सिरे पर आंख लगाकर अंदर देखने का प्रयास करते हैं कि कैल्शियम कार्बाइल पानी के संपर्क में आ रहा है कि नहीं। इसी क्रम में अचानक तेजी से हुआ विस्फोट आंखों की रेटिना तक उड़ा देता है।

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