मध्य पूर्व में America, Israel और Iran के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक 5000 से अधिक बम गिराए जा चुके हैं, जिनसे भारी तबाही हुई है। इस संघर्ष में 1200 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं।
युद्ध के कारण कई शहरों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इमारतें मलबे में बदल रही हैं और बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष को लेकर चिंतित है और कई देश युद्ध रोकने की अपील कर रहे हैं।
लगातार हो रही बमबारी से बढ़ी तबाही
युद्ध के आठ दिनों के दौरान America और Israel की ओर से Iran के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और रणनीतिक स्थानों पर लगातार हवाई हमले किए गए हैं। इन हमलों में हजारों बम गिराए गए हैं जिससे कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है।
रिपोर्ट्स के अनुसार कई शहरों में रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। अस्पतालों और राहत एजेंसियों पर घायल लोगों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
मरने वालों की संख्या 1200 के पार
इस संघर्ष में अब तक 1200 से अधिक लोगों की मौत की खबर सामने आ चुकी है। मरने वालों में नागरिकों की संख्या भी काफी ज्यादा बताई जा रही है। हजारों लोग घायल हैं और कई गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं।
मानवीय संकट भी तेजी से गहराता जा रहा है। कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। राहत एजेंसियों को भी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
Iran ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से दिया जवाब
America और Israel के हमलों के बाद Iran ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। Iran की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं। इन हमलों का निशाना इजराइल के कुछ सैन्य ठिकाने और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकाने बताए जा रहे हैं। Iran का कहना है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई कर रहा है। वहीं Israel और America का दावा है कि यह अभियान सुरक्षा कारणों से चलाया जा रहा है।
पूरे क्षेत्र में बढ़ा युद्ध का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अगर जल्द नहीं रुका तो पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ सकता है। कई देशों ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताया है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी युद्धविराम की मांग की है ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और मानवीय सहायता प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सके।
तेल बाजार में बढ़ी अनिश्चितता
मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में यहां बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। युद्ध के कारण तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
दुनिया भर के देश कर रहे कूटनीतिक प्रयास
कई देश इस संकट को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। America, यूरोप और एशिया के कई देशों ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। कुछ देशों ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील भी की है। हालांकि फिलहाल जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और संघर्ष थमने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं।
आम नागरिकों पर सबसे ज्यादा असर
इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। लगातार हो रही बमबारी के कारण लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल है। हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाइयां और जरूरी सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन युद्ध की स्थिति के कारण राहत कार्यों में भी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील है और सभी देश शांति की उम्मीद कर रहे हैं।
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