Iran के साथ जारी सैन्य युद्ध America के लिए आर्थिक और सामरिक दोनों ही मोर्चों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। शुरुआती तीन सप्ताह के भीतर अमेरिकी सैन्य संसाधनों को अरबों डॉलर का नुकसान होने का अनुमान सामने आया है। रक्षा सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आई जानकारियों के अनुसार इस नुकसान का बड़ा हिस्सा लड़ाकू विमानों, ड्रोन, वायु रक्षा प्रणालियों और नौसैनिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है। इससे न केवल America की तत्काल सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है बल्कि लंबे समय तक क्षेत्र में तैनाती की लागत भी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है।
युद्ध का बढ़ता आर्थिक बोझ और पेंटागन की तैयारी
युद्ध के बढ़ते खर्च को देखते हुए America रक्षा विभाग पेंटागन ने अतिरिक्त बजट की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि व्हाइट हाउस को भेजे गए प्रारंभिक प्रस्ताव में करीब दो सौ अरब डॉलर तक के संभावित अतिरिक्त सैन्य व्यय का अनुमान जताया गया है। इस प्रस्ताव में क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, नौसैनिक अभियानों का विस्तार, मिसाइल अवरोधन प्रणाली की मजबूती और क्षतिग्रस्त सैन्य उपकरणों की मरम्मत या पुनः खरीद शामिल है। खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक सैन्य उपस्थिति बनाए रखना पहले से ही महंगा रहा है, लेकिन मौजूदा युद्ध ने इस लागत को कई गुना बढ़ा दिया है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
America लड़ाकू विमानों को भारी झटका
युद्ध के दौरान अमेरिकी वायुसेना को सबसे बड़ा नुकसान लड़ाकू और सहायक विमानों के स्तर पर उठाना पड़ा है। कुवैत क्षेत्र में एक फ्रेंडली फायर घटना के दौरान तीन एफ पंद्रह ई स्ट्राइक ईगल विमानों के नष्ट होने की जानकारी सामने आई है। प्रत्येक विमान की कीमत लगभग दस करोड़ डॉलर मानी जाती है, जिससे यह नुकसान काफी बड़ा माना जा रहा है।
इसके अलावा America का अत्याधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमान एफ पैंतीस लाइटनिंग टू भी तकनीकी रूप से प्रभावित हुआ। गंभीर खराबी के बाद इस विमान को आपात स्थिति में उतारना पड़ा। यह विमान अमेरिकी वायुसेना की सबसे उन्नत तकनीक का हिस्सा है और इसकी प्रति इकाई लागत भी काफी अधिक है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं युद्ध की जटिलता और जोखिम को दर्शाती हैं।
टैंकर बेड़े और लंबी दूरी अभियानों पर असर
America की लंबी दूरी की सैन्य क्षमताओं में हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस युद्ध में केसी एक सौ पैंतीस स्ट्रैटोटैंकर को भी नुकसान पहुंचा है। इराक में एक टैंकर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जबकि सऊदी अरब में तैनात पांच अन्य टैंकर विमानों को हमलों या छर्रों से क्षति पहुंची। इन टैंकर विमानों के प्रभावित होने से अमेरिकी वायु अभियानों की निरंतरता और प्रभावशीलता पर असर पड़ सकता है। हालांकि अमेरिका धीरे धीरे पुराने टैंकरों की जगह नए केसी छियालिस पेगासस को शामिल कर रहा है, फिर भी मौजूदा नुकसान से परिचालन क्षमता पर दबाव बढ़ा है।
ड्रोन बेड़े को बड़ा नुकसान
युद्ध के दौरान America ड्रोन बेड़े को भी गंभीर झटका लगा है। जानकारी के अनुसार एक दर्जन से अधिक एमक्यू नौ रीपर ड्रोन या तो मार गिराए गए हैं या फिर परिचालन से बाहर हो गए हैं। ये ड्रोन निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सीमित हमलों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। प्रत्येक रीपर ड्रोन की कीमत करोड़ों डॉलर में होती है और इनका नुकसान केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि रणनीतिक भी होता है। ड्रोन के कम होने से क्षेत्र में निगरानी क्षमता प्रभावित होती है, जिससे भविष्य की सैन्य योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
वायु रक्षा प्रणाली पर हमला और नई चुनौती
America की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली भी इस युद्ध में निशाने पर रही है। जॉर्डन में तैनात थाड प्रणाली के रडार को मिसाइल हमले में नुकसान पहुंचने की खबर है। यह प्रणाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसकी लागत भी काफी अधिक होती है। इसके अलावा कतर के अल उदैद एयर बेस पर मौजूद एक उन्नत रक्षा नेटवर्क के प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई है। इस नेटवर्क में रडार, संचार प्रणाली और बहुस्तरीय वायु रक्षा तंत्र शामिल थे। इन प्रणालियों के प्रभावित होने से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आई हैं।
नौसैनिक बेड़े को भी झटका
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना को भी नुकसान झेलना पड़ा है। विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड में आग लगने की घटना के बाद जहाज के एक हिस्से को मरम्मत के लिए हटाना पड़ा। यह पोत अमेरिकी नौसेना की ताकत का प्रमुख प्रतीक माना जाता है और इसकी किसी भी प्रकार की क्षति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। नौसैनिक संसाधनों में आई इस तरह की समस्याएं समुद्री अभियानों की गति और प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में तनाव चरम पर हो।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौती
Iran की ओर से किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को बड़ी चुनौती बना दिया है। लगातार हमलों के खतरे के कारण America को अपने संसाधनों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय करने पड़ रहे हैं, जिससे लागत और बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है तो America को न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। लंबे समय तक सैन्य उपस्थिति बनाए रखना, उपकरणों की भरपाई करना और नई तकनीकों को तैनात करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
Iran के साथ जारी यह युद्ध America के लिए केवल सैन्य चुनौती नहीं बल्कि एक आर्थिक परीक्षा भी बनता जा रहा है। शुरुआती हफ्तों में ही अरबों डॉलर का नुकसान यह संकेत देता है कि आगे का रास्ता और भी कठिन हो सकता है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो America को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। साथ ही, यह युद्ध वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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