भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की मांग को लेकर सोमवार को Indore के शिप्रा थाना क्षेत्र में किसानों द्वारा निकाली जा रही ट्रैक्टर रैली को पुलिस ने रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। वहीं, कुछ किसानों को हिरासत में भी लिया गया। यह ट्रैक्टर रैली Indore से भोपाल तक निकाले जाने की तैयारी थी। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के बदले सभी प्रभावित किसानों को समान रूप से चार गुना मुआवजा दिया जाए।
भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के संबंध में किसान सोमवार को शिप्रा के समीप बरलाई गांव में एकत्र हुए। यहां से बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ रैली निकालने की तैयारी की गई थी। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन में 300 से अधिक ट्रैक्टर शामिल थे। किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में रैली निकालने का निर्णय लिया था। रैली को देखते हुए प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था की थी। शिप्रा थाना क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर ट्रैक्टरों को आगे बढ़ने से रोका गया। मौके पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। रैली रुकने के बाद किसानों और पुलिस के बीच बातचीत का प्रयास भी किया गया।
प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल

प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का उपयोग किया। घटनास्थल से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पुलिस की ओर से पानी की बौछार किए जाने के दृश्य दिखाई दिए। कुछ मीडिया रिपोर्टों में आंसू गैस के गोले छोड़े जाने का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ किसानों को हिरासत में लिया। मौके पर पुलिस वाहन के माध्यम से किसानों को ले जाते हुए भी देखा गया। प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई। हिरासत में लिए गए किसानों की संख्या को लेकर अलग अलग रिपोर्टों में अलग आंकड़े सामने आए हैं।
किसानों की क्या है प्रमुख मांग?
प्रदर्शन कर रहे किसानों की मुख्य मांग भूमि अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा दिए जाने की है। किसानों का कहना है कि जिन किसानों की जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें समान आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों का यह भी कहना है कि सभी प्रभावित किसानों के लिए एक जैसी मुआवजा व्यवस्था लागू की जाए।
पहले भी उठ चुका है मुआवजे का मुद्दा

भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का यह विषय नया नहीं है। इससे पहले भी किसान संगठनों ने पूर्वी और पश्चिमी रिंग रोड परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर कई बार अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखी हैं। पूर्व में हुए आंदोलनों में भी किसानों ने संशोधित गाइडलाइन दरों के आधार पर मुआवजा देने और प्रभावित किसानों के लिए समान व्यवस्था लागू करने की मांग की थी। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने पहले से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। बैरिकेडिंग के साथ यातायात व्यवस्था को भी नियंत्रित किया गया ताकि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो। अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी गई।
ट्रैक्टर रैली को लेकर पहले से थी तैयारी
किसानों द्वारा पहले ही ट्रैक्टर रैली निकालने की घोषणा की गई थी। इसी के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी। रैली के दौरान बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ निर्धारित स्थान पर पहुंचे। बाद में पुलिस द्वारा रैली को आगे बढ़ने से रोका गया, जिसके बाद घटनास्थल पर स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण रही।
सोमवार को हुए इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन और किसान पक्ष की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े इस विषय को लेकर आगे की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें हैं। फिलहाल संबंधित विभागों की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था जारी है।
