Indore शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद कई उपभोक्ताओं ने बिजली बिल में अचानक बढ़ोतरी की शिकायत की है। लोगों का कहना है कि पहले जहां उनका मासिक बिजली बिल 10 से 12 हजार रुपये के बीच आता था, वहीं अब कुछ मामलों में बिल कई गुना अधिक पहुंच गया है। बढ़े हुए बिलों को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है और उन्होंने बिजली वितरण कंपनी से मीटर की जांच तथा बिल सत्यापन की मांग की है। हालांकि विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर वास्तविक बिजली खपत के आधार पर बिल तैयार करते हैं और यदि किसी उपभोक्ता को बिल पर आपत्ति है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज कराकर मीटर की जांच कराई जा सकती है।
Indore में तेजी से लगाए जा रहे हैं स्मार्ट मीटर
मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा Indore और उज्जैन संभाग में स्मार्ट मीटर परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक बिजली मीटरों की जगह आधुनिक डिजिटल मीटर लगाकर बिजली खपत की सटीक निगरानी करना है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली खपत का आंकड़ा सीधे नियंत्रण केंद्र तक पहुंचता है, जिससे मैनुअल रीडिंग की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और बिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का दावा किया जाता है।
आखिर क्या है उपभोक्ताओं की शिकायत?
स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके बिजली बिलों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई है। कई परिवारों का दावा है कि बिजली की खपत पहले जैसी ही रही, लेकिन बिल पहले की तुलना में काफी अधिक आया। इससे नाराज उपभोक्ता बिजली कार्यालय पहुंचे और बिल सत्यापन के साथ मीटर की तकनीकी जांच कराने की मांग की। कई लोगों ने विभागीय अधिकारियों को लिखित आवेदन भी सौंपे हैं।
बिजली कंपनी का क्या है पक्ष?
बिजली वितरण कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह डिजिटल तकनीक पर आधारित हैं और वास्तविक बिजली खपत के अनुसार ही बिल तैयार करते हैं। विभाग का कहना है कि इनमें मैनुअल रीडिंग की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए रीडिंग संबंधी त्रुटियों की संभावना कम रहती है। यदि किसी उपभोक्ता को बिल पर संदेह है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत मिलने पर मीटर और बिल दोनों की जांच की जाती है और आवश्यकता होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
दूसरे राज्यों में भी सामने आईं शिकायतें
स्मार्ट मीटर को लेकर केवल Indore ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों से भी शिकायतें सामने आई हैं। महाराष्ट्र के ठाणे, कल्याण और डोंबिवली जैसे क्षेत्रों में भी कई उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल बढ़ने का दावा किया है। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए और बिजली कंपनियों से जांच की मांग की गई। हालांकि संबंधित कंपनियों का कहना है कि प्रत्येक शिकायत की अलग अलग जांच की जाती है और बिना तकनीकी परीक्षण के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
कैसे काम करते हैं स्मार्ट मीटर?
स्मार्ट मीटर बिजली की खपत का रिकॉर्ड रियल टाइम में दर्ज करते हैं और यह जानकारी सीधे बिजली कंपनी के सर्वर तक भेजते हैं। इससे मीटर रीडर के घर जाकर रीडिंग लेने की जरूरत नहीं रहती। कई उपभोक्ता मोबाइल एप के माध्यम से अपनी दैनिक और मासिक बिजली खपत भी देख सकते हैं। सरकार का दावा है कि इससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और बिजली चोरी पर भी नियंत्रण मिलेगा।
किन कारणों से बढ़ सकता है बिजली बिल?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार केवल स्मार्ट मीटर लगना ही बिल बढ़ने का कारण नहीं माना जा सकता। वास्तविक बिजली खपत बढ़ना, पुराने मीटर में कम रीडिंग दर्ज होना, बिजली दरों में बदलाव, अतिरिक्त विद्युत भार का उपयोग या किसी तकनीकी गड़बड़ी जैसी कई वजहें भी हो सकती हैं। इसलिए हर मामले में अलग से जांच आवश्यक होती है।
उपभोक्ता क्या कर सकते हैं?
यदि किसी उपभोक्ता को बिजली बिल असामान्य रूप से अधिक लगता है तो वह पिछले महीनों की यूनिट खपत से तुलना कर सकता है। इसके अलावा संबंधित बिजली कार्यालय में लिखित शिकायत देकर मीटर परीक्षण और बिल सत्यापन की मांग की जा सकती है। विभाग का कहना है कि जांच में यदि किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि सामने आती है तो नियमानुसार सुधार किया जाएगा।
