मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी Indore में पिछले 15 दिनों से छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलनों के बीच Indore के भंवरकुआं स्थित टंट्या भील चौराहे के पास भी बड़ी संख्या में छात्र और छात्राएं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके कारण उन्हें लगातार विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
मंगलवार को आंदोलनरत छात्रों ने Indore भंवरकुआं क्षेत्र से कलेक्टोरेट कार्यालय तक पैदल रैली निकाली। बड़ी संख्या में छात्र हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते हुए पहुंचे। कलेक्टोरेट पहुंचने के बाद विद्यार्थियों ने करीब पांच घंटे तक धरना दिया और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।
आकांक्षा योजना में अनियमितता का आरोप
आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों के लिए संचालित आकांक्षा योजना का लाभ पात्र विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच रहा है। उनका आरोप है कि योजना के तहत मिलने वाली कोचिंग, अध्ययन सामग्री और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। छात्रों का कहना है कि जिन सुविधाओं के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जानी थी, वे प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और छात्र निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
80 करोड़ रुपये के टैबलेट नहीं मिलने का दावा
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का आरोप है कि योजना के अंतर्गत खरीदे गए करीब 80 करोड़ रुपये मूल्य के टैबलेट अब तक पात्र छात्रों को वितरित नहीं किए गए हैं। उनका यह भी दावा है कि विशेष कक्षाओं के संचालन के लिए नियुक्त एजेंसी नियमित रूप से कक्षाएं नहीं लगा रही है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इन दावों की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आंदोलन के दौरान कुछ छात्र और छात्राओं ने अपना मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि कई बार ज्ञापन देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, इसलिए उन्हें प्रतीकात्मक रूप से यह कदम उठाना पड़ा। विद्यार्थियों ने इसे शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास बताया।
23 सूत्रीय मांगों पर अड़े छात्र
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने प्रशासन के सामने 23 सूत्रीय मांगपत्र रखा है। इसमें आकांक्षा योजना की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई, संबंधित एजेंसी का टेंडर निरस्त करने, शिक्षा संबंधी सुविधाओं में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा जैसी मांगें शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
विद्यार्थियों का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए और शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि शिक्षा और विद्यार्थियों के अधिकारों के लिए है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और आकांक्षा योजना सहित अन्य मुद्दों का शीघ्र समाधान निकाले। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी Indore में पिछले 15 दिनों से छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलनों के बीच Indore के भंवरकुआं स्थित टंट्या भील चौराहे के पास भी बड़ी संख्या में छात्र और छात्राएं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके कारण उन्हें लगातार विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
कलेक्टोरेट तक निकाली गई रैली
मंगलवार को आंदोलनरत छात्रों ने भंवरकुआं क्षेत्र से कलेक्टोरेट कार्यालय तक पैदल रैली निकाली। बड़ी संख्या में छात्र हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते हुए पहुंचे। कलेक्टोरेट पहुंचने के बाद विद्यार्थियों ने करीब पांच घंटे तक धरना दिया और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।
आकांक्षा योजना में अनियमितता का आरोप
आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों के लिए संचालित आकांक्षा योजना का लाभ पात्र विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच रहा है। उनका आरोप है कि योजना के तहत मिलने वाली कोचिंग, अध्ययन सामग्री और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। छात्रों का कहना है कि जिन सुविधाओं के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जानी थी, वे प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और छात्र निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
80 करोड़ रुपये के टैबलेट नहीं मिलने का दावा
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का आरोप है कि योजना के अंतर्गत खरीदे गए करीब 80 करोड़ रुपये मूल्य के टैबलेट अब तक पात्र छात्रों को वितरित नहीं किए गए हैं। उनका यह भी दावा है कि विशेष कक्षाओं के संचालन के लिए नियुक्त एजेंसी नियमित रूप से कक्षाएं नहीं लगा रही है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इन दावों की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Indore में आंदोलन के दौरान कुछ छात्र और छात्राओं ने अपना मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि कई बार ज्ञापन देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, इसलिए उन्हें प्रतीकात्मक रूप से यह कदम उठाना पड़ा। विद्यार्थियों ने इसे शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास बताया।
23 सूत्रीय मांगों पर अड़े छात्र
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने प्रशासन के सामने 23 सूत्रीय मांगपत्र रखा है। इसमें आकांक्षा योजना की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई, संबंधित एजेंसी का टेंडर निरस्त करने, शिक्षा संबंधी सुविधाओं में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा जैसी मांगें शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
विद्यार्थियों का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए और शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि शिक्षा और विद्यार्थियों के अधिकारों के लिए है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और आकांक्षा योजना सहित अन्य मुद्दों का शीघ्र समाधान निकाले। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
