Aurbindo Hospital: इंदौर में शुक्रवार का दिन कई लोगों के लिए भय और दर्द से भरा साबित हुआ, जब एक आवारा कुत्ते ने सुबह से लेकर शाम तक शहर के कई इलाकों में दहशत फैला दी। यह घटना केवल एक सामान्य डॉग बाइट की घटना नहीं थी, बल्कि इसने शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुबह करीब नौ बजे शुरू हुआ यह घटनाक्रम शाम छह बजे तक चलता रहा और इस दौरान डॉक्टरों, नर्सों, मरीजों, छात्रों, सुरक्षा कर्मियों तथा आम नागरिकों सहित 40 से अधिक लोग कुत्ते के हमले का शिकार बने।
घटना की शुरुआत Aurbindo Hospital परिसर से हुई, जहां बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन मौजूद थे। Aurbindo Hospital जैसे संवेदनशील स्थान पर अचानक हुए इस हमले ने लोगों में अफरा तफरी का माहौल पैदा कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुत्ता बेहद आक्रामक अवस्था में था और सामने आने वाले लोगों पर लगातार हमला कर रहा था।
महिला डॉक्टर पर पहले हमले से फैली दहशत
जानकारी के अनुसार कुत्ते ने सबसे पहले अस्पताल परिसर में मौजूद एक महिला डॉक्टर पर हमला किया। इसके बाद उसने Aurbindo Hospital के अन्य हिस्सों में घूमकर कई लोगों को काट लिया। Aurbindo Hospital में उपचार के लिए आए मरीज और उनके परिजन अचानक हुए हमले से घबरा गए। कई लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में दहशत का माहौल बन गया। Aurbindo Hospital प्रबंधन और सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन कुत्ता लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर भागता रहा। इस दौरान कई स्वास्थ्यकर्मी भी उसकी चपेट में आ गए।
डॉक्टर, नर्स, मरीज और छात्र बने शिकार
इस घटना में घायल होने वालों की सूची काफी लंबी है। घायलों में डॉक्टर, नर्स, छात्र, सुरक्षा कर्मचारी, मरीज और आम नागरिक शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार डॉ. स्मृति, डॉ. अधिशिता, सचिन राजपूत, अंजनी शर्मा, सीमा, शोभा, परिणीता, कुसुम, प्रणव, गोविंद, विष्णु, अफसर और राजीव सहित कई अन्य लोग कुत्ते के हमले का शिकार बने।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कुत्ते के काटने की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इससे रेबीज जैसी घातक बीमारी का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि सभी घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और आवश्यक टीके लगाए गए।

Aurbindo Hospital से बाहर निकलकर कई इलाकों में मचाया आतंक
अस्पताल परिसर में हमला करने के बाद कुत्ता वहां से बाहर निकल गया। आमतौर पर ऐसी घटनाओं में जानवर किसी एक क्षेत्र तक सीमित रहते हैं, लेकिन इस मामले में कुत्ते ने कई किलोमीटर तक लोगों को निशाना बनाया।
जानकारी के अनुसार Aurbindo Hospital से निकलने के बाद वह एलएनसीटी कॉलेज क्षेत्र पहुंचा। इसके बाद बड़दरी गांव, रेवती रेंज और रेनेसां कॉलेज के आसपास के इलाकों में भी उसने लोगों पर हमला किया। रास्ते में आने वाले कई लोग उसके हमले का शिकार बने। लगातार कई घंटों तक चलने वाली इस घटना ने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर दिया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
घायलों को अस्पतालों में कराया गया भर्ती
घटना के बाद घायल लोगों को उपचार के लिए Aurbindo Hospital और हुकुमचंद अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम ने सभी घायलों की जांच की और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। विशेषज्ञों के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद समय पर उपचार और एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी होता है। देरी होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए सभी घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता रही।
इंदौर में हर महीने पांच हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले
यह घटना केवल एक दिन की दुर्घटना नहीं है, बल्कि शहर में लगातार बढ़ रही एक गंभीर समस्या का संकेत है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इंदौर में हर महीने पांच हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार बन रहे हैं। यदि इन आंकड़ों को दैनिक आधार पर देखा जाए तो औसतन 180 से अधिक लोग प्रतिदिन डॉग बाइट की घटनाओं के बाद उपचार के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। यह संख्या बताती है कि समस्या कितनी व्यापक हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में तेजी से बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और उनके प्रभावी प्रबंधन की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल है।
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या बनी चिंता का विषय
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी, खुले में फेंका जाने वाला कचरा और भोजन की आसान उपलब्धता आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ाने वाले प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं, जो कभी कभी आक्रामक व्यवहार भी करने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी घटनाओं की संख्या और बढ़ सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर इसका खतरा सबसे अधिक रहता है।
नगर निगम और प्रशासन पर उठे सवाल
इतनी बड़ी घटना के बाद नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई क्षेत्रों में लंबे समय से आवारा कुत्तों की समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान दिखाई नहीं देता।
लोगों का मानना है कि नियमित नसबंदी, टीकाकरण और निगरानी अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों जैसे अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों के आसपास विशेष व्यवस्था की आवश्यकता है।
