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Madhya Pradesh में बड़ा मुद्दा बनता जाति प्रमाण पत्र, सैकड़ों अधिकारी भी घिरे

मंत्री से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक जांच की आंच

Last updated: जुलाई 3, 2026 5:01 अपराह्न
By Divisha 4 महीना पहले
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4 Min Read
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Madhya Pradesh में जाति प्रमाण पत्र बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। Madhya Pradesh सरकार की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी और गौतम टेटवाल के जाति प्रमाण पत्रों की जाँच की चर्चा ज्यादा हो रही है। मगर बीते 15 साल में राज्य स्तरीय छानबीन समिति के पास 7,000 के करीब प्रकरण विचाराधीन हैं। हैरानी इसलिए ज्यादा है क्योंकि इनमें करीब 500 के करीब मामले वरिष्ठ अधिकारियों के हैं। कई नेताओं के दो कार्यकाल पूरे होने के बाद पता चला कि प्रमाण पत्र सही नहीं है।

नगरीय विकास और आवास विभाग की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को जाति प्रमाण पत्र मामले में छह जुलाई को छानबीन समिति के सामने उपस्थित होना है। Madhya Pradesh सरकार के ही राज्य मंत्री गौतम टेटवाल के प्रमाण पत्र से जुड़ा मामला भी कोर्ट तक पहुंचा था। टेटवाल के मामले में शिकायत थी कि उनकी जाति जीनगर ओबीसी में आती है, लेकिन अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित सारंगपुर सीट से साल 2008 में चुनाव लड़ा और जीते भी।

दरअसल, 2015 में एससी मामलों की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने उनके जाति प्रमाण पत्र को सही बताया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया है छानबीन समिति में पहले ही निर्णय हो चुका है।

हजारों मामले लंबित कई नेताओं के प्रमाण पत्र भी सवालों में

भाजपा नेता ज्योति धुर्वे 2009 और 2014 में लोकसभा सदस्य रहीं। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सुरक्षित बैतूल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ीं। ज्योति धुर्वे का गोंड जाति प्रमाण पत्र अवैध होने का आरोप उनके खिलाफ चुनाव लड़नेग वाले कांग्रेस उम्मीदवार ओझाराम इवने ने लगाया था। हाई कोर्ट में केस दायर किया। हाई कोर्ट के निर्देश पर उच्चस्तरीय छानबीन समिति ने जाँच के बाद प्रमाण पत्र अवैध पाया था। इसके बाद उन्होंने छानबीन समिति के समक्ष रिव्यू करने की अपील की, पर उसमें भी उन्हें राहत नहीं मिली। इस बीच लोकसभा सदस्य के रूप में उनके दो कार्यकाल पूरे हो गए। उनका जाति प्रमाण पिता की जगह पति की जाति के आधार पर बना था।

छानबीन समिति के पास हजारों की संख्या में प्रकरण लंबित हैं। कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने भी विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। ऐसी शिकायत के अधिकतर मामले एसटी वर्ग के हैं। मामलों की सुनवाई सप्ताह में सिर्फ एक दिन होती है। उसमें भी पांच मामले ही सुने जाते हैं। इसी तरह से एक दिन एससी के लिए रखे गए हैं।

सुनवाई की धीमी रफ्तार से बढ़ रहा लंबित मामलों का बोझ

कांग्रेस नेता जजपाल जज्जी ने एससी के लिए सुरक्षित अशोकनगर सीट से वर्ष 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। विधायक बनने पर उनके जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठे। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने उनके अनुसूचित जाति (नट) होने का प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया था। अगस्त 2023 में डबल बेंच से राहत मिली थी।

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TAGGED: caste. certificate, india, indore, madhya pradesh, pratima bagri, thefourth, thefourthindia
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